चीन पर माइक्रोनेशिया के राष्ट्रपति डेविड पैनुएलो ने बड़ा आरोप लगाया है। पैनुएलो ने कहा कि चीन प्रशांत क्षेत्र में 'राजनीतिक युद्ध' में लगा है। वह हमारे देश के नेताओं और अधिकारियों को रिश्वत देकर खरीदने की कोशिश करता है। पैनुएलो ने चीन से खुद की जान को भी खतरा बताया।
राष्ट्रपति डेविड पैनुएलो का कार्यकाल दो महीने में खत्म हो रहा है। इसके पहले उन्होंने एक पत्र लिखकर चीन पर बड़ा हमला किया। डेविड पैनुएलो के पत्र में आरोप लगाया गया है कि चीन ताइवान के द्वीप पर संघर्ष की तैयारी कर रहा था। चीन का उद्देश्य फेडरेटेड स्टेट्स ऑफ माइक्रोनेशिया (FSM) में हस्तक्षेप करके किसी भी संभावित प्रशांत क्षेत्र में युद्ध कराना था।
राष्ट्रपति ने क्या-क्या आरोप लगाया?
माइक्रोनेशिया के राष्ट्रपति ने कहा, 'चीन यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है कि माइक्रोनेशिया के रिश्ते अमेरिका से बिगड़ जाएं।' उन्होंने कहा कि माइक्रोनेशिया अमेरिका का एक पुराना सहयोगी है। राष्ट्रों के पास एक औपचारिक "मुक्त संघ का संघ" है और इसकी रक्षा के लिए अमेरिका पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
माइक्रोनेशिया की कांग्रेस और राज्य के राज्यपालों को लिखे अपने पत्र में पैनुएलो ने खुले तौर पर देश की राजनयिक मान्यता को बीजिंग से ताइपे में बदलने का सुझाव दिया। कहा कि उन्होंने इस साल फरवरी में ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू से मुलाकात की थी। इस दौरान हमने उनको बताया कि हम चीन के बजाय उन्हें समर्थन देने के लिए राजनयिक संबंधों को बदल दें सकते हैं। इसके बदले में वह हमें 50 मिलियन डॉलर के इंजेक्शन देने के लिए भी तैयार हैं। जिससे भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि माइक्रोनेशिया को वार्षिक 15 मिलियन डॉलर का "सहायता पैकेज" भी प्राप्त होगा।
पनुएलो ने माइक्रोनेशिया में चीन की वर्तमान गतिविधियों के लिए चीन की निंदा भी की। कहा कि उनका मानना है कि चीन माइक्रोनेशिया के समुद्री क्षेत्र में "अनुसंधान" की आड़ में जासूसी कर रहा था। उन्होंने इसके लिए अमेरिका में मिले जासूसी गुब्बारे का उदाहरण भी दिया।
उन्होंने कहा, 'सीधे शब्दों में, हम अपने देश में राजनीतिक युद्ध देख रहे हैं। जिसमें राजनीतिक गठजोड़, आर्थिक उपाय, सार्वजनिक प्रचार, रिश्वतखोरी, मनोवैज्ञानिक युद्ध और ब्लैकमेल जैसी गुप्त गतिविधियां शामिल हैं।'