विश्वप्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग पशुपति नाथ मन्दिर क्षेत्र में बागमती नदी के किनारे 13 वर्ष से जारी गंगा आरती से पहले राष्ट्रगान बजाने को लेकर विवाद पैदा हो गया है। सरकार के आदेश पर दो सप्ताह पहले शुरू किए गए राष्ट्रगान बजाने के निर्णय का चौतरफा विरोध हो रहा है। सरकार के आदेश के बाद आठ दिन तक निरंतर आरती से पहले राष्ट्रगान बजाने के बाद गत सोमवार से वागमती गंगा पशुपति आरती सेवा संचालक समिति ने राष्ट्रगान बजाना बन्द कर दिया है ।
नेपाल सरकार ने पहले सिनेमा ह़ाल सार्वजनिक कार्यक्रमों और सरकारी आयोजनों से पहले राष्ट्रीय गीत बजाकर शुरूआत करने का फरमान जारी किया था। यह फरमान गंगा आरती के लिए भी अनिवार्य किया गया है। इस संबंध में वागमती गंगा पशुपति आरती सेवा संचालक समिति के उपाध्यक्ष डॉ.वासुदेव कृष्ण शास्त्री ने अमर उजाला से कहा कि सरकार की निकाय ‘पशुपति क्षेत्र विकास कोष’ ने आरती से पहले राष्ट्रगान बजाना जारी रखने के लिए कहा है, पर हमलोगों ने कहा कि यह संभव नही होगा।
इसलिए राष्ट्रगान बजाना बन्द कर दिया गया है। डॉ.शास्त्री के अनुसार बनारस मे जिस तरह गंगा आरती होती है उसी तरह पशुपति नाथ मे भी 13 वर्षो से आरती हो रही है। आरती स्थल के नजदीक ही आर्यघाट(श्मशान) होने के कारण इधर राष्ट्रगान हो रहा होता है उधर, लाशें जल रही होती हैं और मृतक के परिजन रो रहे होते हैं। ऐसे में वहां राष्ट्रगान बजाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि बनारस से शंकराचार्यजी ने भी फोन करके इस बारे में जानकारी ली थी।
उधर, नेपाल के संस्कृति व पर्यटन तथा नागरिक उड्डयन मंत्री योगेश भट्टराइ ने कहा है कि पशुपति नाथ मन्दिर मे गंगा आरती के दरम्यान शुरू किए गए राष्ट्रगान से नजदीक में श्मशान से कोई फर्क नहीं पड़ता।
उन्होने पशुपति क्षेत्र मे होने वाली सांस्कृतिक गतिविधियों को जोड़ते हुए कहा कि तीज मे पशुपति नाथ दर्शन के लिए आने वाली महिलाएं नाच रही होती हैं और अन्य बातें भी हो रही होती हैं। गंगा आरती से पहले राष्ट्रीय गीत बजाना बंद होने से बागमती आरती परिवार पर कार्रवाई की भी संभावना है।
इसलिए पशुपति क्षेत्र विकास समिति आरती परिवार से पुन: राष्ट्रगान शुरू करने का दबाव बना रही है। वहीं, सरकार के इस निर्णय की काफी आलोचना हो रही है। नेपाली नागरिको द्वारा सामाजिक नेटवर्किंग पर भी सरकार के इस निर्णय का व्यापक विरोध किया जा रहा है।