विपक्षी पार्टियां इमरान खान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का एलान कर चुकी हैं। फिलहाल वे इस प्रस्ताव के समर्थन में अधिक से अधिक पार्टियों को जुटाने की मुहिम जुटी हुई हैं। इसी सिलसिले में रविवार को इमरान खान ने धमकी दी कि अगर अविश्वास प्रस्ताव गिर गया, तो उसके बाद विपक्षी दलों को ये प्रस्ताव लाने का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। उन्होंने कहा- ‘अगर आपका अविश्वास प्रस्ताव गिर गया तो उसके बाद मैं आपके साथ क्या करुंगा, क्या आपको इसका अंदाजा है?’
फजलुर रहमान को बोला 'डीजल'
इमरान खान ने कहा कि विपक्षी नेता उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाना चाहते हैं ताकि उसके बाद वे देश को लूटना जारी रख सकें। उन्होंने पूछा कि आखिर पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) को कौन समर्थन दे रहा है और फिर सवाल उठाया- ‘क्या कोई लोमड़ी नेता बन सकती है।’ इमरान खान ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को ‘नंबर एक अपराधी’ बताया। उन्होंने पीएमएल-नवाज के कार्यकर्ताओं से पूछा कि नवाज शरीफ दुम दबा कर क्यों देश से भाग गए?
इमरान खान एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। इसमें उन्होंने दूसरे विपक्षी नेताओं के खिलाफ भी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के सह-अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को उन्होंने ‘एक बीमारी’ बताया। कहा कि जरदारी हर काम में दस फीसदी कमीशन खाने के लिए बदनाम थे। विपक्षी दलों के गठबंधन- पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के नेता मौलाना फजलुर रहमान को उन्होंने फजलु डीजल कह कर संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वे उन्हें कभी मौलाना नहीं कहेंगे, क्योंकि ये शब्द शिक्षित और विश्वसनीय व्यक्ति के लिए है। इमरान ने कहा- ‘मौलाना शब्द उस व्यक्ति के लिए इस्तेमाल नहीं हो सकता, जो डीजल के परमिट बेचता है।’
पंजाब विधानसभा के स्पीकर ने किया आगाह
इमरान खान के इस लहजे की विपक्षी हलकों में कड़ी आलोचना की गई है। उधर, पाकिस्तान मुस्लिम लीग (कायद) के अध्यक्ष और पंजाब विधानसभा के स्पीकर परवेज इलाही ने इमरान खान को आगाह किया है कि वे अपने सलाहकारों से सावधान रहें। इलाही ने कहा कि ये सलाहकार प्रधानमंत्री और मीडिया के बीच टकराव पैदा कर रहे हैं। इलाही ने प्रधानमंत्री को भेजे एक संदेश में इमरान खान के सहयोगियों की तरफ से हाल में दिए गए बयानों को लेकर चिंता जताई है।
अखबार डॉन में छपी खबर के मुताबिक इस संदेश में इलाही ने कहा- ‘पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के कुछ सदस्यों को कुछ मीडिया चैनलों ने अपनी बहस में शामिल होने से रोक दिया है। इसलिए अगर पीटीआई इसी राह पर चलती रही, तो वह देश के सामने संतुलित नैरेटिव पेश नहीं कर पाएगी।’ इलाही ने कुछ अखबारों और मीडिया घरानों को विज्ञापन देने पर लगाई गई कथित रोक पर भी चिंता जताई है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि इमरान खान और उनके नेतृत्व वाली पीटीआई का रुख हाल में कुछ ज्यादा ही आक्रामक हो गया है। इससे उनकी छवि और खराब हो रही है।