अमेरिका में उम्मीद के मुताबिक रोजगार पैदा करने में नाकामी के कारण जो बाइडन प्रशासन की नीतियों पर हमले तेज हो गए हैं। बता दें कि शुक्रवार को अप्रैल के आंकड़े जारी हुए तो मालूम हुआ कि इस महीने सिर्फ दो लाख 66 हजार नौकरियां पैदा हुईं। वहीं, बाइडन प्रशासन से जुड़े विशेषज्ञों ने लगभग दस लाख नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान जताया था। बाइडन प्रशासन को उम्मीद थी कि उसके कोरोना राहत पैकेज से देश की अर्थव्यवस्था में नई गति आएगी, जिससे अधिक रोजगार पैदा होंगे। हालांकि, शुरुआती आंकड़ों से उसे मायूसी हुई है।
ताजा आंकड़े जारी होते ही रिपब्लिकन पार्टी ने राष्ट्रपति बाइडन पर जोरदार हमला बोल दिया। उसने कहा कि गैर जरूरी सरकारी खर्च करके बाइडन प्रशासन देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहा है। अधिक बेरोजगारी भत्ते के भुगतान से लोग नौकरी खोजने की बजाय घर पर बैठना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। अमेरिकी कारोबारियों की सबसे बड़ी संस्था यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी ऐसी ही राय जताई। उसने कहा कि 300 डॉलर हर हफ्ते बेरोजगारी भत्ता देने की योजना के कारण लोगों ने घर पर ही बैठना पसंद किया।
इस संस्था ने कहा, 'रोजगार के निराशाजनक आंकड़ों से साफ हो गया है कि काम न करने के लिए लोगों को पैसा देने की योजना ने जॉब मार्केट को कमजोर बना दिया है।' यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने 300 डॉलर की हफ्तेवार बेरोजगारी सहायता को तुरंत बंद करने की मांग की। उसने कहा है कि वह इस योजना को खत्म कराने के लिए सांसदों के बीच लॉबिंग करेगी।
राष्ट्रपति बाइडन ने इस आलोचना का जवाब देते हुए कहा है कि आर्थिक सुधार की प्रक्रिया 100 मीटर की दौड़ नहीं, बल्कि मैराथन दौड़ है। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था और जॉब मार्केट के सुधार में समय लगेगा। बाइडन ने कहा कि ऐसे कोई आंकड़े मौजूद नहीं हैं, जिससे कहा जाए कि जिन लोगों को बेरोजगारी भत्ता मिल रहा है, वे नौकरी नहीं ढूंढ रहे। आपको ऐसा लगता है कि आज टीकाकारों की राय सुनकर हम निराश होंगे, लेकिन जब हमने कोरोना राहत पैकेज पारित किया था तो ऐसा एक साल तक मदद के लिए किया गया था, 60 दिन के लिए नहीं। यह साफ है कि हमें लंबा रास्ता तय करना है।
बाइडन ने कहा कि जब से वह राष्ट्रपति बने हैं, कुल मिलाकर 15 लाख लोगों को नौकरियां मिली हैं। यह औसत हर महीने पांच लाख नौकरियों का बैठता है। इससे निम्न और मध्य स्तरों की सहायता करते हुए अर्थव्यवस्था को उठाने की नई रणनीति की पुष्टि होती है। वित्त मंत्री जेनेट येलेन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'हम यह सुन रहे हैं कि कारोबारियों को कर्मचारी ढूंढने में दिक्कत आ रही है, लेकिन यह मानने की कोई वजह नहीं है कि लोगों को बेरोजगारी भत्ता मिलना इसके पीछे बड़ा कारण है।
डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव खेमे ने कोरोना राहत पैकेज के आलोचकों की मंशा पर सवाल उठाया। इस खेमे से जुड़ीं हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव की सदस्य इल्हान उमर ने कहा कि पूंजीपति 300 डॉलर हर हफ्ते की सहायता को खत्म करवाने के लिए लाखों डॉलर लॉबिंग पर खर्च कर देंगे, जिससे वे इसे अपनी तिजोरी में डाल सकें। उनके लालच की कोई सीमा नहीं है। सोशलिस्ट सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने कहा कि अगर 300 डॉलर के बेरोजगारी भत्ते के कारण लोग नौकरी नहीं ढूंढ रहे हैं तो इसका सीधा समाधान है कि न्यूनतम वेतन उससे ज्यादा कर दिया जाए। अमेरिका में जरूरत न्यूनतम वेतन बढ़ाने की है, जो भुखमरी का कारण बना हुआ है।