सूडान में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए चलाए जा रहे अभियान 'ऑपरेशन कावेरी' के तहत 135 फंसे भारतीयों को सूडान से सऊदी अरब के जेद्दा लाया जा रहा है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने गुरुवार को ट्वीट किया, 135 भारतीयों को वायुसेना के सी-130जे विमान से जेद्दा लाया जा रहा हैं। मंगलवार को दक्षिण सूडान के विदेश मंत्रालय के एक बयान के अनुसार, सूडान में दो युद्धरत गुटों सूडानी सशस्त्र बल और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्स ने सात दिनों के युद्धविराम पर सहमति व्यक्त की। 11 मई तक हुए युद्धविराम को देखते हुए भारत ने नागरिकों को वहां से निकालने का अभियान और तेज कर दिया गया है।
गृहयुद्ध का सामना कर रहे सूडान में फंसे भारतीयों को निकालने के लिए जारी ऑपरेशन कावेरी के तहत 231 और नागरिकों का जत्था बुधवार को स्वदेश लाया गया। ये भारतीय एक वाणिज्यिक विमान से मुंबई पहुंचे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने ट्वीट किया, एक और ऑपरेशन कावेरी उड़ान नागरिकों को घर वापस ले आई। 231 यात्रियों को लेकर विमान मुंबई में उतरा है। इन भारतीयों को सऊदी अरब के शहर जेद्दा से घर वापस लाया गया। एजेंसी
सूडान से 131 भारतीयों का 21वां जत्था पहुंचा जेद्दा
सूडान में फंसे 137 भारतीयों का 21वां जत्था बुधवार को सऊदी अरब के शहर जेद्दा पहुंचा। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सूडान से स्वदेश वापस लाए गए भारतीयों की कुल संख्या अब 2,930 पहुंच गई है।
मिस्र का दावा, 40,000 से अधिक सूडानी नागरिक उसकी सीमा में घुसे...
मिस्र का दावा है कि 40,000 सूडानी नागरिक उसकी सीमा में घुस आए हैं। वहीं अन्य चाड, दक्षिण सूडान और इथियोपिया चल गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बिजली और पानी की आपूर्ति अनिश्चित हो गई है। खाने की सामग्री और ईंधन की कमी हो गई है और अधिकांश अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र बंद हो चुके हैं। ऐसे हालात में उनके पास पलायन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
सूडान में युद्धविराम की अवधि फिर बढ़ी, फायरिंग जारी
सूडान में युद्धविराम की अवधि अगले 72 घंटे तक बढ़ाने पर फिर सहमति हो गई हैं, मगर कई हिस्सों में अब भी फायरिंग जारी है। सूडान की सेना और प्रतिद्वंद्वी अर्धसैनिक बल ने कहा है कि वे संघर्ष-विराम अगले 72 घंटे के लिए बढ़ाएंगे। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अब तक संघर्ष में 528 नागरिकों की मौत हो चुकी है और 4,599 लोग घायल हो गए हैं। दोनों पक्षों की ओर से यह निर्णय नागरिकों और सहायता सामग्री के लिए सुरक्षित मार्ग प्रदान करने के अंतरराष्ट्रीय दबाव के बाद आया है। इस बीच, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर उल्लंघन का आरोप लगाया। लोग पलायन को मजबूर हैं।