दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ने रविवार को बड़ा फैसला लिया है। इस समूह के आठ देशों ने कहा है कि वे अप्रैल महीने से रोजाना 2.06 लाख बैरल कच्चे तेल का अतिरिक्त उत्पादन करेंगे। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर बड़ा सैन्य हमला किया है और ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। तेल उत्पादन बढ़ाने वाले देशों में सऊदी अरब, रूस, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कजखस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं। विश्लेषकों को उम्मीद थी कि उत्पादन बढ़ेगा, लेकिन इतनी बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम मानी जा रही थी।
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वैश्विक बाजार में आ सकती है तेल की कमी
इसी बीच खाड़ी क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण हैं। खासकर हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर हमलों से स्थिति और गंभीर हो गई है। यह वही संकरा समुद्री रास्ता है, जिससे रोज करीब 1.5 करोड़ बैरल तेल गुजरता है। यानी दुनिया के लगभग 20% तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। अगर यहां आवाजाही प्रभावित होती है, तो वैश्विक बाजार में तेल की कमी हो सकती है।
ईरान से सप्लाई रुकने पर महंगा होता तेल
ईरान रोजाना करीब 16 लाख बैरल तेल निर्यात करता है, जिसमें से ज्यादातर चीन को जाता है। अगर ईरान की सप्लाई रुकती है, तो चीन को दूसरे देशों से महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें और बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जब रविवार देर रात से तेल की ट्रेडिंग शुरू होगी, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। अनुमान है कि ब्रेंट क्रूड की कीमत 20 डॉलर तक बढ़ सकती है। फिलहाल शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड 72.87 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ था, जो पिछले सात महीनों का उच्च स्तर है।
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ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय असली चिंता यह नहीं है कि तेल कितना पैदा हो रहा है, बल्कि यह है कि क्या वह सुरक्षित तरीके से बाजार तक पहुंच पा रहा है या नहीं। अगर खाड़ी क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही रुकी, तो उत्पादन बढ़ाने का फैसला भी तुरंत राहत नहीं दे पाएगा।
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