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यूक्रेन संकट: कैसे है कीव और नई दिल्ली के रिश्ते? भारतीयों का वहां कितना असर?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Tue, 22 Feb 2022 04:51 PM IST

सार

कीव में भारतीय व्यापार समुदाय के अलावा लगभग 20,000 छात्र यूक्रेन के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे हैं। यूक्रेन के शिक्षा और विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेन में विदेशी छात्रों में से 24 फीसदी भारत से हैं।
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यूक्रेन संकट पर भारत की प्रतिक्रिया - फोटो : ANI
चारों तरफ बंदूकें, टैंकर, हथियारों से लदे सैनिक और अगले पल की प्रतीक्षा में निरंतर भय और अनिश्चितता। दूसरी तरफ हवाईअड्डों की तरफ अपनी अगली उड़ान पकड़ने के लिए दौड़ते भारतीय छात्र और नागरिक। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के खतरे के मद्देनजर भारतीयों को लेकर आ रही ऐसी रिपोर्ट्स चिंता बढ़ा रही है क्योंकि यूक्रेन में रूसी हमले की आशंका गहराती ही जा रही है। 

इस बीच भारत ने छात्रों से एक बार फिर से अपील की है कि, वे तुरंत यूक्रेन छोड़कर भारत लौटें। भारत की ओर से कहा गया है कि, ऑनलाइन क्लासों की आधिकारिक घोषणा का इंतजार किए बिना भारतीय छात्र वापस लौटना शुरू करें। भारत की ओर से नागरिकों को निकालने के लिए अतिरिक्त उड़ाने भी शुरू की गई हैं। छात्रों को उड़ानों की उपलब्धता से लेकर निकासी विवरण तक की पूरी सहायता मिल रही है। 


समझते हैं कि यूक्रेन- भारत के कैसे रिश्ते हैं?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक यूक्रेन के साथ भारत के सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंध है। भारत, यूक्रेन को पहले मान्यता देने वाले देशों में से एक है। इसलिए यहां के निवासियों में भारतीयों के लिए बहुत सम्मान है। भारत ने यहां की राजधानी कीव में अपना दूतावास मई 1992 में खोला गया। वहीं यूक्रेन ने एशिया में अपना पहला मिशन फरवरी 1993 में दिल्ली में खोला। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

पिछले 25 वर्षों में और 2018-19 में  लगभग 2.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार हुआ है। यूक्रेन से भारत में निर्यात की जाने वाली मुख्य वस्तुएं कृषि उत्पाद, प्लास्टिक और पॉलिमर हैं। कीव खाना पकाने के तेल का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता रहा है  पिछले साल भारत में लगभग 74 फीसदी सूरजमुखी तेल की यूक्रेन से हुई थी। जबकि भारत फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, रसायन, खाद्य उत्पादों का आयात करता है।
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यूक्रेन संकट पर भारत की प्रतिक्रिया - फोटो : ANI
चारों तरफ बंदूकें, टैंकर, हथियारों से लदे सैनिक और अगले पल की प्रतीक्षा में निरंतर भय और अनिश्चितता। दूसरी तरफ हवाईअड्डों की तरफ अपनी अगली उड़ान पकड़ने के लिए दौड़ते भारतीय छात्र और नागरिक। यूक्रेन पर रूसी आक्रमण के खतरे के मद्देनजर भारतीयों को लेकर आ रही ऐसी रिपोर्ट्स चिंता बढ़ा रही है क्योंकि यूक्रेन में रूसी हमले की आशंका गहराती ही जा रही है। 

इस बीच भारत ने छात्रों से एक बार फिर से अपील की है कि, वे तुरंत यूक्रेन छोड़कर भारत लौटें। भारत की ओर से कहा गया है कि, ऑनलाइन क्लासों की आधिकारिक घोषणा का इंतजार किए बिना भारतीय छात्र वापस लौटना शुरू करें। भारत की ओर से नागरिकों को निकालने के लिए अतिरिक्त उड़ाने भी शुरू की गई हैं। छात्रों को उड़ानों की उपलब्धता से लेकर निकासी विवरण तक की पूरी सहायता मिल रही है। 

समझते हैं कि यूक्रेन- भारत के कैसे रिश्ते हैं?
विदेश मंत्रालय के मुताबिक यूक्रेन के साथ भारत के सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंध है। भारत, यूक्रेन को पहले मान्यता देने वाले देशों में से एक है। इसलिए यहां के निवासियों में भारतीयों के लिए बहुत सम्मान है। भारत ने यहां की राजधानी कीव में अपना दूतावास मई 1992 में खोला गया। वहीं यूक्रेन ने एशिया में अपना पहला मिशन फरवरी 1993 में दिल्ली में खोला। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

पिछले 25 वर्षों में और 2018-19 में  लगभग 2.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर का व्यापार हुआ है। यूक्रेन से भारत में निर्यात की जाने वाली मुख्य वस्तुएं कृषि उत्पाद, प्लास्टिक और पॉलिमर हैं। कीव खाना पकाने के तेल का एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता रहा है  पिछले साल भारत में लगभग 74 फीसदी सूरजमुखी तेल की यूक्रेन से हुई थी। जबकि भारत फार्मास्यूटिकल्स, मशीनरी, रसायन, खाद्य उत्पादों का आयात करता है।

यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गए अनुवाक चौधरी अपने मित्रों के साथ। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पेशेवर और छात्र
यूक्रेन में कुछ भारतीय समुदाय के लोग हैं जिनमें से ज्यादातर बिजनेसमैन, व्यावसायिक पेशेवर और छात्र हैं। ये पेशेवर फार्मास्यूटिकल्स, आईटी, इंजीनियरिंग, मेडिकल और शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े हैं। करीब 20 हजार  भारतीय छात्र यूक्रेन के विश्वविद्यालयों में खासतौर पर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ इंजीनियरिंग की शिक्षा भी हासिल कर रहे हैं। यूक्रेन से प्राप्त एमबीबीएस की डिग्री पूरे भारत में मान्य है।

हर साल बड़ी संख्या में छात्र मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन जाते हैं। मेडिकल शिक्षा यहां सस्ती होने की वजह से यह भारतीय छात्रों की पसंदीदा जगह है। यूक्रेन के शिक्षा और विज्ञान मंत्रालय के अनुसार, यूक्रेन में विदेशी छात्रों में से 24 फीसदी भारत से हैं। 1991 में यूक्रेन की स्वतंत्रता के बाद हजारों की संख्या में  भारतीय छात्र यहां मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए आने लगे। 

भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी रूचि 
विदेश मंत्रालय के मुताबिक यूक्रेन में भारतीय संस्कृति को लेकर लोगों में बहुत रुचि है। वहां के लोग भारतीय नृत्य, योग, दर्शन, आयुर्वेद और आध्यात्मिकता को पसंद करते हैं। देश भर में 30 से अधिक यूक्रेनी सांस्कृतिक संघ/समूह हैं जो भारतीय संस्कृति और कला को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं, खासकर भारतीय नृत्यों को। अधिकांश समूहों के सदस्यों ने अपने स्तर पर भारतीय नृत्यों को सीखा है।

भारतीय दूतावास ने 2017 में कीव में 'भारत का उत्सव' कार्यक्रम का आयोजन किया था। जिसके माध्यम से भारतीय संस्कृति की समृद्धि और विविधता को प्रदर्शित किया गया। भारत के संगीत, नृत्य और कलाओं का भी प्रदर्शन हुआ। 2019 में भारतीय नृत्य महोत्सव जिसे वहां 'रिदम ऑफ जॉय' कहा गया, इसमें पूरे देश से 300 से अधिक यूक्रेन के कलाकारों ने हिस्सा लिया और उन्होंने भारतीय नृत्यों का प्रदर्शन किया।

यूक्रेन में भारतीय दूतावास - फोटो : सोशल मीडिया
भारतीय दूतावास ने कीव के सहयोग से यहां भारतीय समुदाय कल्याण कोष की स्थापना की है। भारतीय प्रवासियों ने यहां 2001 में 'इंडिया क्लब' बनाया है जिसमें भारतीय डायस्पोरा सक्रिय रूप से शामिल रहता है और होली, दिवाली जैसे भारतीय त्योहार, क्रिकेट टूर्नामेंट, डांस फेस्टिवल और बॉलीवुड फिल्मों की स्क्रीनिंग आदि करते हैं।

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाता है
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पूरे यूक्रेन में व्यापक रूप से मनाया जाता है। 2018 और 2019 में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस समारोह यूक्रेन के 22 शहरों में मनाया गया जिसमें 10 हजार से अधिक लोग शामिल हुए।

कुछ भारतीय फिल्मों की शूटिंग भी यूक्रेन में हुई है, जैसे 'विनर' 2016 के नवंबर-दिसंबर में कीव में शूट हुई। भारत में काफी लोकप्रिय हुई फिल्म 'बाहुबली 2: द कन्क्लूजन' के विजुअल एफेक्ट बनाने में एक यूक्रेनी स्टूडियो के विशेषज्ञ शामिल हुए थे।
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