पाकिस्तान में इमरान खान सरकार के खिलाफ विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को लेकर जैसा उन्मादी माहौल बन रहा है, उससे देश में अवांछित घटनाएं होने का अंदेशा गहरा गया है। अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के दिन सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने इस्लामाबाद में दस लाख लोगों की रैली का एलान किया है। इसके जवाब में विपक्ष अपनी रैली आयोजित करने की तैयारियों में जुट गया है। विपक्ष का कहना है कि उस रोज वह अपने 20 लाख समर्थकों को राजधानी में इकट्ठा करेगा।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक ये पहला मौका नहीं है, जब इस्लामाबाद में इस तरह की भीड़ जुटाई जा रही है। 2014 में पीटीआई और पाकिस्तान अवामी तहरीक ने संसद भवन के पास धरना आयोजित किया था। उस दौरान हिंसा भड़क उठी थी। इन दलों के समर्थकों ने संसद भवन और पाकिस्तान के सरकारी टीवी चैनल पीटीवी के दफ्तर पर धावा बोल दिया था। उस मामले में जिन लोगों को मुख्य अभियुक्त बनाया गया था, वे अभी पाकिस्तान में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और अन्य बड़े पदों पर आसीन है।
पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) के नेता अहसान इकबाल ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री इमरान खान कैपिटल हिल जैसी घटना को यहां दोहराने की तैयारी कर रहे हैं। इकबाल ने कहा- ‘ट्रंप अपने मकसद में नाकाम रहे, इमरान खान भी फेल होंगे।’ इकबाल की आशंका समर्थन पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सीनेटर शेरी रहमान ने भी किया है। उन्होंने कहा है कि इमरान खान इसलिए भीड़ जुटा रहे हैं, ताकि उनके खिलाफ मतदान करने वाले सांसदों को डराया जा सके। उन्होंने कहा- अगर सरकार को भरोसा है कि नेशनल असेंबली में उसके पास बहुमत है, तो वह भीड़ जुटा कर हिंसा करने का रास्ता क्यों अपना रही है?
भीड़ जुटाने की पहल प्रधानमंत्री इमरान खान ने की है। उन्होंने कहा है कि अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के समय ‘इंसानों का समंदर’ नेशनल असेंबली को घेर लेगा। इमरान खान के यह एलान करने के बाद उनकी सरकार के मंत्री और पार्टी के नेता भी लगातार ऐसे भड़काऊ बयान दे रहे हैं। एक कैबिनेट मंत्री ने यह भी कहा है कि जिन सदस्यों ने सरकार के खिलाफ मतदान किया, उन्हें भीड़ की हिंसा का सामना करना पड़ सकता है।