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एक अगस्त को 93 साल की हो जाएगी चीन की सेना, 20 हजार से 20 लाख हुई सैनिकों की संख्या

Fri, 31 Jul 2020 06:18 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

  • सुपर पावर बनने की कोशिश में चीन ने पीएलए की बढ़ाई ताकत
  • 2050 तक चीन को दुनिया का सबसे ताकतवर देश बनाने में लगे हैं शी जिनपिंग
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PLA china Army - फोटो : File Photo
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विस्तार
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आपने गौर किया होगा कि जब से कोरोना या कोविड-19 का आतंक चारों तरफ फैला, पूरी दुनिया उसकी शिकार हुई और खासकर खुद को सुपर पावर बताने वाला अमेरिका भी इससे तबाही की कगार पर पहुंच गया, ऐसे वक्त में पूरी दुनिया में चीन की खबरें छा गईं। खासकर चीन ने इस बीच जो खबरें सबसे ज्यादा मीडिया में प्रचारित करवाईं उनमें उसकी बढ़ती ताकत और रक्षा तैयारियों के अलावा पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी पीएलए की खबरें सबसे ज्यादा थीं।

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अब ये सिलसिला और बढ़ गया है। दरअसल एक अगस्त को पीएलए अपने 93 साल पूरे करने जा रही है और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस मौके पर ये बताने की कोशिश करने वाले हैं कि चीन दुनिया का सबसे ताकतवर देश है और चीन की सेना ही उसे सुपर पावर बना रही है।

शी जिनपिंग सेंट्रल मिलिट्री कमीशन के चेयरमैन भी हैं और पार्टी के महासचिव तो वे हैं ही। उन्होंने जब से ये जिम्मेदारी संभाली है चीन की पूरी सेना का ढांचा बदल दिया है, इसका चेहरा अब पहले की तरह नहीं रहा और हर तरह के कॉम्बैट ऑपरेशंस में पीएलए की सबसे बड़ी भूमिका रहती है।
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1927 में जब पीएलए बनी थी, तो इसके पास 20 हजार सैनिक हुआ करते थे, जबकि आज 20 लाख सैनिक हैं। शी जिनपिंग ने अपना मकसद बनाया है चीन की सेना को सबसे ताकतवर बनाना और देश और दुनिया के तमाम क्षेत्रों में पीएलए की भूमिका बढ़ाना।

कोरोना काल के दौरान जिनपिंग ने ऐसा किया भी और हर जगह अग्रिम मोर्चे पर पीएलए को ही रखा। लोगों की मदद करने से लेकर, स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना, बेहद कम वक्त में अस्पताल बनवाना और लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाना। जहां-जहां भी चीन ने इस दौरान अपनी मदद भेजी, वहां पीएलए की टीम को ही भेजा गया।

शी जिनपिंग के शासनकाल में चीन में आंतरिक और बाहरी चुनौतियां तेजी से बढ़ी हैं और इसे देखते हुए उन्होंने चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के 19वें अधिवेशन में साफतौर पर कह दिया था कि उनकी प्राथमिकता पीएलए को 2050 तक दुनिया की सबसे मजबूत और आधुनिकतम तकनीक से लैस सेना बनाना है।

उन्होंने वादा किया था कि वह पीएलए का चेहरा बदल देंगे और चीन को सुपर पावर बनाने के लिए पीएलए को अपना सबसे मजबूत हथियार बनाएंगे। जाहिर है चीन उसी दिशा में बढ़ रहा है और सबसे पहले खुद को दक्षिण और मध्य एशियाई देशों का सरताज बनाने में लगा है।

जाहिर है भारत समेत तमाम देश चीन की इस मंशा को अच्छी तरह समझते हैं और अपनी अपनी ताकत बढ़ाने में भी लगे हैं। लेकिन कूटनीतिक तौर पर देखें तो कोरोना संकट के इस दौर का सबसे ज्यादा फायदा चीन ने उठाया है और वह अपनी ताकत मजबूत करने के साथ ही दूसरे देशों पर अपना धौंस जमाने में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता।   

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