सार
ओमान के तट पर जून से फंसे एक प्रतिबंधित तेल टैंकर से कच्चे तेल का रिसाव बढ़ने के संकेत मिले हैं। उपग्रह तस्वीरों में करीब 20 वर्ग किलोमीटर तक तेल की परत फैलती दिखाई दी। इस पर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जहाज का ढांचा टूटा तो बड़ा पर्यावरणीय संकट पैदा हो सकता है। यह रिसाव कितना गंभीर है और समुद्री जीवन पर इसका क्या असर पड़ सकता है? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
ओमान के तट पर मंडरा रहा बड़ा खतरा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
ओमान के तट पर फंसे एक प्रतिबंधित तेल टैंकर से कच्चे तेल का रिसाव बढ़ने के संकेत मिले हैं। हाल की उपग्रह तस्वीरों में समुद्र की सतह पर तेल की परत फैलती दिखाई दी है। यह टैंकर समुद्री संरक्षित क्षेत्र के पास फंसा हुआ है, जिससे पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते टैंकर को नहीं हटाया गया और उसका ढांचा टूट गया तो बड़ा तेल रिसाव हो सकता है, जिससे समुद्री जीवों और तटीय इलाकों को भारी नुकसान पहुंच सकता है।
रिसाव कितना फैला और किन इलाकों पर असर दिख रहा?
उपग्रह तस्वीरों के अनुसार तेल की पतली परत करीब 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैल चुकी है। ओमान के धोफार क्षेत्र के किब्लियाह द्वीप के तट पर भी कच्चे तेल के धब्बे दिखाई दिए हैं। यह द्वीप हल्लानियात द्वीप समूह का हिस्सा है। पर्यावरण विशेषज्ञ विम ज़्वाइनेनबर्ग ने बताया कि पिछले एक सप्ताह से टैंकर से कम मात्रा में लगातार तेल निकल रहा है और अब इसका फैलाव धीरे-धीरे बढ़ रहा है। उनके अनुसार हाल के दिनों में रिसाव की मात्रा पहले की तुलना में अधिक दिखाई दे रही है।
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सबसे बड़ा खतरा क्या माना जा रहा?
विशेषज्ञों के अनुसार सबसे बड़ा खतरा यह है कि तेज हवाओं और समुद्री लहरों के कारण टैंकर का ढांचा टूट सकता है। मई से सितंबर तक चलने वाले मानसून के दौरान इस इलाके में समुद्र काफी उग्र रहता है। विम ज़्वाइनेनबर्ग का अनुमान है कि टैंकर में आठ लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल मौजूद है। यदि पूरा तेल समुद्र में फैल गया तो यह क्षेत्र बड़े पर्यावरणीय संकट का सामना कर सकता है। 28 जुलाई की उपग्रह तस्वीरों में तेल का अधिकांश हिस्सा जहाज के उत्तर-पश्चिमी हिस्से की खाड़ी में दिखाई दिया था।
यह टैंकर क्यों चर्चा में?
274 मीटर लंबा सुएजमैक्स टैंकर कैरोलिन बेजेंगी ब्रिटेन के प्रतिबंधों की सूची में शामिल है। ब्रिटेन के अनुसार यह टैंकर रूस से आए तेल की ढुलाई करता रहा है और ऐसी गतिविधियों में शामिल रहा है, जिनका प्रभाव यूक्रेन को अस्थिर करने से जुड़ा माना गया। इस टैंकर पर यूरोपीय संघ, कनाडा और स्विट्जरलैंड ने भी प्रतिबंध लगाए हैं। भू-स्थानिक डेटा ट्रैकिंग कंपनी सिनमैक्स मैरिटाइम के अनुसार मई में यह टैंकर रूस के नोवोरोसिस्क बंदरगाह पर देखा गया था। इसके बाद यह अपनी हालिया यात्रा पर निकला। रिपोर्टों के अनुसार जून में ओमान के तट पर फंसने के समय चालक दल ने जहाज पर विस्फोट होने की सूचना भी दी थी, हालांकि इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पर्यावरण को लेकर क्या चेतावनी दी गई?
ग्रीनपीस जर्मनी की नीना नोएल ने कहा कि यह घटना तथाकथित "शैडो फ्लीट" से जुड़े पर्यावरणीय खतरों का एक और उदाहरण है। उनके अनुसार 24 जुलाई तक ही तेल रिसाव का असर तटीय इलाकों और संवेदनशील समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर दिखाई देने लगा था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तेल का रिसाव जारी रहा और टैंकर कठिन स्थान पर फंसा रहा तो इससे कहीं बड़ा तेल प्रदूषण हो सकता है। इससे समुद्री जीवों, तटीय इलाकों और पूरे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
ओमान सरकार ने क्या कदम उठाए?
जिस क्षेत्र में टैंकर फंसा है, वह अरब सागर के समुद्री संरक्षित क्षेत्र का हिस्सा है। यहां दुर्लभ समुद्री स्तनधारी जीव, कई पक्षी प्रजातियां और संकटग्रस्त पेट्रेल पक्षी पाए जाते हैं। ओमान के परिवहन, संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने जहाज के मालिकों को 23 जुलाई तक टैंकर और उसके तेल को हटाने का आदेश दिया था। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि जहाज के मालिकों ने इस आदेश पर क्या जवाब दिया है या हटाने की प्रक्रिया शुरू की है।