नेशनल असेंबली में 18 सदस्यों के साथ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी सेंटर) सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद 16 सदस्यों के साथ नेपाली कांग्रेस है जबकि ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के 11 सदस्य हैं और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत समाजवादी) के पास आठ सीटें हैं।
नेपाल में प्रमुख मधेसी पार्टी जनता समाजवादी पार्टी (जसपा) नेपाल ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाले सत्तारूढ़ गठबंधन से औपचारिक रूप से समर्थन वापस ले लिया है। इससे ओली सरकार उच्च सदन नेशनल असेंबली में अल्पमत में आ गई है। हालांकि उपेंद्र यादव के नेतृत्व वाली जसपा के समर्थन वापस लेने से गठबंधन सरकार पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा क्योंकि उसके पास प्रतिनिधि सभा में पर्याप्त संख्या है।
विज्ञापन
ओली की पार्टी ने कहा कि उसे जसपा नेपाल के समर्थन वापस लेने का कोई कारण नहीं दिखता है। जसपा नेपाल ने 23 और 24 जून को हुई पार्टी की कार्यकारी परिषद की बैठक के दौरान सरकार से समर्थन वापस लेने का निर्णय लिया था। जसपा नेपाल के उपाध्यक्ष शिव लाल थापा ने बताया कि पार्टी अब कुछ दिनों में संसदीय दल की बैठक बुलाने के बाद संसद के अध्यक्ष को आधिकारिक रूप से अपना निर्णय बताएगी। उन्होंने बताया कि पिछले साल नेपाली कांग्रेस के समर्थन से सरकार का नेतृत्व संभालते समय ओली ने भ्रष्टाचार समाप्त करने, सुशासन लाने, आर्थिक प्रगति करने और संविधान में संशोधन करने का वादा किया था। हमने इन चार एजेंडों पर सरकार को समर्थन दिया था। लेकिन एक साल बाद भी हमें नहीं लगता कि सरकार को इन मुद्दों की कोई चिंता है। इसलिए हमने ओली के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस लेने का फैसला किया है।
नेशनल असेंबली में 18 सदस्यों के साथ कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (माओवादी सेंटर) सबसे बड़ी पार्टी है। इसके बाद 16 सदस्यों के साथ नेपाली कांग्रेस है जबकि ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के 11 सदस्य हैं और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एकीकृत समाजवादी) के पास आठ सीटें हैं। अन्य में, जसपा नेपाल के पास तीन सीटें, राष्ट्रीय जनमोर्चा और लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के पास एक-एक सीट है तथा एक निर्दलीय है। इस तरह नेपाली कांग्रेस और सीपीएन (यूएमएल) के सत्तारूढ़ गठबंधन के पास 59 सदस्यीय सदन में 27 सीटें हैं।