चीन के खिलाफ अमेरिका और ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी की लामबंदी ने दुनिया में बन रहे शीत युद्ध जैसे माहौल को और गरमा दिया है। एक असाधारण कदम उठाते हुए अमेरिकी और ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों ने एक मंच पर आकर चीन पर औद्योगिक जासूसी करने के इल्जाम लगाए। बुधवार को उन्होंने पश्चिमी कंपनियों को इस बारे में आगाह किया। लंदन में दुनिया के भर प्रमुख कारोबारियों की बैठक को संबोधित करते हुए अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई के निदेशक क्रिस्टोफर रे ने कहा- ‘जब आप किसी चीनी कंपनी से कारोबार करते हैं, तो आपको इस बात से वाकिफ होना चाहिए कि आप चीन सरकार से डील कर रहे हैं। चीन की सेना भी उनकी खामोश सहभागी होती है।’
इन टिप्पणियों को अमेरिका और ब्रिटेन की तरफ से उद्योगपतियों और व्यापारियों को आगाह करने की एक विशेष पहल के रूप में देखा गया है। हाल के वर्षों में अमेरिका, ब्रिटेन, और यूरोपीय देशों ने चीन पर कई तरह के व्यापार प्रतिबंध लगाए हैं। इसके बावजूद पश्चिमी कंपनियों ने चीन में अपना कारोबार जारी रखा है। समझा जाता है कि ऐसा उन्होंने मुनाफे को ध्यान में रख कर किया है। अब ब्रिटेन और अमेरिका ने उन्हें यह बताने की कोशिश की है कि तात्कालिक मुनाफा उनके लिए दीर्घकालिक नुकसान का सौदा साबित हो सकता है।
अमेरिका कई वर्षों से चीन पर बौद्धिक संपदा और तकनीक चुराने के आरोप लगा रहा है। यही आरोप लगाते हुए पूर्व डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने चीन से कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की नीति अपनाई थी। जो बाइडन प्रशासन ने भी उन नीतियों को जारी रखा है। खास कर उन कंपनियों से कारोबार पर रोक लगाई गई है, जिनका संबंध चीनी सेना- पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से समझा जाता है।
लेकिन अमेरिकी सरकार अपनी कंपनियों को चीन में कारोबार बंद करने के लिए राजी नहीं कर पाई है। बल्कि बीते तीन वर्षों में अमेरिका में चीनी उत्पादों का आयात बढ़ा है। अमेरिका में बढ़ी महंगाई के बीच कई उद्योग समूहों ने बाइडेन प्रशासन से मांग की है कि चीनी उत्पादों पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को वह हटा ले। इस बीच बाइडन प्रशासन ने चीन के प्रांत शिनजियांग से होने वाले आयात को रोकने के लिए नया कानून लागू किया है।