Nuclear Arms pact- Russia nuclear warheads
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यूक्रेन युद्ध की पहली बरसी पर रूस और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों की होड़ फिर शुरू की आशंका गहरा गई है। इस सिलसिले में ताजा पहलू 21 फरवरी को जुड़ा, जब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने स्ट्रेटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी (स्टार्ट) में अपने देश की भागीदारी निलंबित करने की घोषणा की। इस संधि के कारण कई दशकों से रूस और अमेरिका नए परमाणु हथियार नहीं बना रहे थे। पुतिन की घोषणा के बाद अब दोनों देशों के बीच अस्त्र नियंत्रण की कोई संधि लागू नहीं रह गई है। ऐसी दो संधियों ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एकतरफा ढंग से अपने देश को निकाल लिया था।
पुतिन ने यूक्रेन युद्ध के एक साल होने से तीन दिन पहले दिए अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में कहा- ‘हमारे संबंध बिगड़ गए हैं और इसके लिए पूरी तरह से अमेरिका ही दोषी है।’ इसके साथ ही उन्होंने धमकी दी कि अगर अमेरिका ने नए परमाणु हथियारों के परीक्षण किए, तो रूस भी ऐसा करेगा। अमेरिका ने हाल में ऐसा कई बार कहा है कि वह अपने परमाणु हथियारों को आधुनिक बना सकता है, ताकि उनकी विश्वसनीयता बनी रहे।
पुतिन के एलान की अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने तुरंत कड़ी निंदा की। उधर नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (नाटो) के प्रमुख जेन्स स्टोल्टेनबर्ग ने कहा कि पुतिन की इस घोषणा के बाद दुनिया ‘अधिक खतरनाक जगह’ बन गई है। इस संधि के तहत यह प्रावधान रहा है कि दोनों देश नियमित रूप से एक-दूसरे परमाणु हथियार भंडार का निरीक्षण करेंगे।
अमेरिका के यूएससी डॉर्नसिफ कॉलेज ऑफ लेटर्स, आर्ट्स एंड साइंस में प्रोफेसर नीला श्रीनिवासन रैठबॉम ने एक विश्लेषण में लिखा है- ‘साल भर से चल रहे यूक्रेन युद्ध के दौरान पुतिन ने बार-बार ऐसी चिंता बढ़ाई है कि अगर युद्ध में रूस को झटके लगे या पश्चिमी देश इसमें शामिल हुए, तो रूस यूक्रेन या किसी अन्य पश्चिमी देश पर परमाणु हमला कर सकता है।’ आशंका है कि आज किसी बड़े शहर पर एक भी परमाणु बम गिराने पर लाखों लोगों की मौत हो सकती है।
विश्लेषकों के मुताबिक अमेरिका और रूस के बीच अस्त्र नियंत्रण समझौते इसलिए कामयाब रहे, क्योंकि उनमें एक दूसरे के अस्त्र भंडारों के निरीक्षण का प्रावधान था। इनमें यह प्रावधान था कि कोई देश नोटिस देकर 24 घंटों के अंदर दूसरे भंडार की पड़ताल कर सकता है। रूस ने जिस न्यू स्टार्ट ट्रीटी को निलंबित किया है, वह 2011 में लागू हुई थी। तब से रूस और अमेरिका ने 306 बार एक दूसरे भंडारों का निरीक्षण किया।
वेबसाइट कन्वर्सेशन पर छपे विश्लेषण में कहा गया है कि ताजा रूसी फैसले के कारण दोनों देशों के परमाणु हथियार भंडारों के बारे में अब कोई पारदर्शिता नहीं रह जाएगी। इससे जोखिम काफी बढ़ जाएगा। वैसे आरोप है कि न्यू स्टार्ट पर रूस ने अमल कुछ समय पहले ही रोक दिया था। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बीते जनवरी में अमेरिकी कांग्रेस में कहा था कि रूस इस संधि पर अमल नहीं कर रहा है। तब रूस ने इस आरोप का खंडन किया था। लेकिन अब पुतिन ने संधि को निलंबित करने की औपचारिक घोषणा कर दी है। इससे पश्चिमी राजधानियों चिंता बढ़ गई है।