अजीत डोभाल ने प्रमुख रूसी अधिकारी से की मुलाकात
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दक्षिण अफ्रीका में अयोजित ब्रिक्स के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (एनएसए) की बैठक से इतर भारत के एनएसए अजीत डोभाल ने चीन के सर्वोच्च राजनयिक वांग यी को आईना दिखाते हुए कहा, भारत-चीन सीमा के पश्चिमी क्षेत्र में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी आक्रामकता की वजह से चीन पर भारत का भरोसा खत्म हो चुका है। विदेश मंत्रालय ने बताया कि दोनों अधिकारियों ने आपसी रिश्तों को द्विपक्षीय, क्षेत्रीय व वैश्विक हित में सामान्य बनाने की जरूरत है।
डोभाल ने वांग यी से साफ कहा, सीमा पर चीन की हरकतों ने चीन के प्रति भारत के रणनीतिक विश्वास और रिश्ते के सार्वजनिक और राजनीतिक आधार को कमजोर कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने यी से कहा, द्विपक्षीय संबंधों में सुधार लाने के यह जरूरी है कि सीमा की स्थिति का पूर्ण निराकरण हो, ताकि वहां शांति और स्थिरता कायम की जा सके। वांग यी की 10 दिन के भीतर भारत के उच्चपदस्थ अधिकारियों के साथ दूसरी बैठक हैं। इससे पहले 15 जुलाई वांग यी ने जकार्ता में आसियान क्षेत्रीय मंच की बैठक से इतर विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बातचीत की थी। वांग यी फिलहाल चीन के सबसे ताकतवर नेताओं में शुमार हैं। चीन पर वास्तविक शासन करने वाले निकाय पोलित ब्यूरो के साथ ही यी चीन के सर्वोच्च कूटनीतक प्राधिकरण, विदेश कार्य आयोग के सर्वोच्च अधिकारी हैं।
साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरों से मिलकर निपटना होगा
फ्रेंड्स ऑफ ब्रिक्स बैठक के दौरान डोभाल ने कहा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उदय के साथ ही साइबर सुरक्षा से जुड़े खतरों में कई गुना बढ़ोतरी होगी। इससे निपटने के लिए सरकारों को साझा प्रयास करने होंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा, साइबर अपराधियों और आतंकियों के बीच रिश्ते जगजाहिर हैं। टेरर फंडिंग, मनी लॉन्ड्रिंग, कट्टरपंथ को बढ़ावा, लोन वोल्फ हमले, आतंकियों की भर्तियां तमाम ऐसी कड़ियां हैं, जिनसे साइबर अपराध और आतंक आपस में जुड़े हैं।
रूसी एनएसए पत्रुशेव से मिले डोभाल
अजीत डोभाल ने रूसी एनएसए निकालाय पत्रुशेव से मुलाकात कर दोनों देशों के संबंधों पर चर्चा की। डोभाल और पत्रुशेव ने खासतौर पर सुरक्षा और अर्थव्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर विचार-विमर्श किया। दोनों अधिकारियों ने रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से वैश्विक ऊर्जा व अनाज संकट की स्थिति को लेकर भी चर्चा की, जिसमें पत्रुशेव ने भरोसा दिलाया कि रूस की तरफ से हमेशा की तरह प्रयास किया जाएगा कि भारत के हित प्रभावित नहीं हों।