उबर कंपनी ने कहा है कि वह ब्रिटेन में कोराबार चलाएगी या नहीं या अगर चलाएगी तो किस रूप में, इस बारे में आने वाले हफ्तों में एलान करेगी। इसके पहले वह ब्रिटेन में कंपनी से जुड़े ड्राइवरों के साथ राय-मशविरा कर रही है। कंपनी क्या फैसला लेती है, उस पर सारी दुनिया की निगाहें हैं। इसकी वजह यह है कि ब्रिटेन में पिछले हफ्ते आए फैसले से उबर का बिजनेस मॉडल खतरे में पड़ गया है। उस फैसले का जो असर वहां होगा, उसे दुनिया के बाकी देशों में एक मिसाल के रूप में लिया जा सकता है।
ब्रिटेन में ड्राइवरों के संगठन, यूनाइटेड प्राइवेट हायर ड्राइवर्स यूनियन ने कहा है कि उबर से राय-मशविरे की जो प्रक्रिया चला रही है, उससे कुछ हासिल होगा, इसमें संदेह है। यूनियन ने वह ई-मेल जारी कर दिया है, जो उबर की तरफ से ड्राइवरों को भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि कोर्ट के फैसले से ड्राइवरों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। लेकिन कंपनी यह जानना चाहती है कि ड्राइवरों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए वह क्या कर सकती है।
उबर कंपनी को अब ब्रिटेन में दो अरब पाउंड का टैक्स भी देना होगा। पहले कंपनी वैल्यू ऐडेड टैक्स देने से बची हुई थी, क्योंकि उसने ये दावा कर रखा था कि ड्राइवर उसके कर्मचारी नहीं हैं। बल्कि वे ‘स्वतंत्र कॉन्ट्रैक्टर’ हैं। लेकिन पिछले हफ्ते आए फैसले में ब्रिटिश कोर्ट ने ड्राइवरों को ‘कर्मचारी’ करार दिया। इसका अर्थ यह हुआ कि ड्राइवर न्यूनतम वेतन, निश्चित कार्य समय और भुगतान के साथ अवकाश पाने के हकदार हो गए हैं।
उबर सारी दुनिया में इसी मॉडल पर करती है। वह ड्राइवरों को अपना कर्मचारी नहीं मानती। लेकिन ब्रिटिश कोर्ट के फैसले से ये मॉडल खतरे में पड़ गया है। हालांकि अभी तक उबर इस फैसले के महत्व को कम करके दिखाने की कोशिश में है। फैसला आने के बाद उसने एक बयान में कहा कि ये केस 2016 में दर्ज हुआ था। उसके बाद से कंपनी का स्वरूप बदल चुका है। बयान में कहा गया कि कंपनी ने अपनी कार्य प्रणाली में कई बदलाव लाए हैं। इनके तहत ड्राइवरों को कमाने के मामले में अधिक नियंत्रण देना और बीमारी या जख्मी होने की स्थितियों के लिए मुफ्त बीमा की सुविधा देना शामिल है।
लेकिन ब्रिटिश कानून के जानकारों का कहना है कि ऐसे परिवर्तनों से कंपनी की कानून बाध्यताओं पर कोई फर्क पड़ेगा, इसकी संभावना कम है। श्रम कानूनों के विशेषज्ञ एलन बॉग ने वेबसाइट पोलिटिको.ईयू से कहा- उबर के मॉडल में ड्राइवरों पर कंपनी का काफी नियंत्रण है। वे कंपनी के अधीनस्थ हैं, जिन्हें कोई वैसी प्रभावी स्वंत्रतता नहीं मिली हुई है, जो उद्यमियों को मिली होती है।
कोर्ट ने ड्राइवरों के कामकाज के समय की परिभाषा भी बदल दी है। उसने निर्णय दिया है कि ड्राइवर उस समय से ड्यूटी पर माने जाएंगे, जब उन्होंने उबर एप ऑन किया हो। अभी कंपनी उन्हें सिर्फ तब ड्यूटी पर मानती है, जब वे ड्राइविंग कर रहे होते हैँ। बॉग के मुताबिक अब ड्राइवर कर्मचारी का दर्जा पाने की याचिका दे सकते हैँ। इससे उन्हें अधिक सुरक्षाएं मिल जाएंगी। अगर ये दर्जा मान लिया गया, तो कंपनी अनुचित ढंग से उन्हें हटा नहीं सकेगी।
कोर्ट में याचिका देने वाले पूर्व उबर ड्राइवर यासीन असलम ने कहा है कि पहला ध्यान अभी आए फैसले को लागू कराने पर है। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में बहुत अच्छे कानून हैं, लेकिन जब बात अमल की आती है, तो समस्या खड़ी हो जाती है। उबर जैसी कंपनियां कानून का उल्लंघन करने के बावजूद सुरक्षित निकल जाती हैँ। बॉग के मुताबिक समस्या यह है कि ब्रिटेन में श्रम कानूनों को लागू कराने वाली ऐसी प्रभावशाली एजेंसी नहीं है, जो संसाधन संपन्न हो।