अब पाकिस्तान और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच तनाव पैदा होने के संकेत मिल रहे हैं। आईएमएफ इस बात पर अड़ा हुआ है कि जब तक पाकिस्तान अपनी राजकोषीय सेहत को मजबूत नहीं बनाता, वह मंजूर लगभग 6.5 बिलियन डॉलर के कर्ज की किस्तों को जारी करना शुरू नहीं करेगा। आईएमएफ के इस रुख से पाकिस्तान में गहरी मायूसी है।
पाकिस्तान रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के ताजा बयान को इसी असंतोष का इजहार माना गया है। आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान की समस्या का हल आईएमएफ के पास नहीं है। यह समाधान पाकिस्तान को अपने अंदर ही ढूंढना होगा। आसिफ ने यह चौंकाने वाली बात भी कही कि पाकिस्तान दिवालिया हो चुका है। अखबार डॉन के मुताबिक उन्होंने कहा- ‘आप यह सुन रहे होंगे कि पाकिस्तान दिवालिया या डिफॉल्टर होने जा रहा है। दरअसल ऐसा पहले ही हो चुका है। हम एक दिवालिया देश में रह रहे हैं।’
उधर आईएमएफ की मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टेलीना जियोर्गिएवा ने कहा है कि पाकिस्तान को अधिक मात्रा में टैक्स वसूलने ही होंगे। इसके लिए उसे धनी लोगों को मिलने वाली सब्सिडी वापस लेनी चाहिए। जर्मनी के रेडियो डॉयशे वेले को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा- पाकिस्तान को ऐसे कदम उठाने होंगे, जिससे वह एक देश के रूप में मौजूद रह सके, ना कि ऐसी खतरनाक जगह बन जाए जहां ऋण को लौटाने का कार्यक्रम दोबारा तय करने की नौबत आए।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक जियोर्गिएवा के इस इंटरव्यू से साफ संकेत मिला है कि आईएमएफ पाकिस्तान पर कोई रहम दिखाने के मूड में नहीं है। जबकि पाकिस्तान के डिफॉल्ट करने (कर्ज चुकाने में अक्षम होने) की स्थितियां लगातार गंभीर होती जा रही हैं। जियोर्गिएवा यह बताने में कोई कोताही नहीं बरती कि आईएमएफ क्या चाहता है। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी जरूरत यह है कि पाकिस्तान कर से होने वाली आमदनी बढ़ाए।
साथ ही आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि पाकिस्तान को सब्सिडी सिर्फ उन लोगों को देनी चाहिए, जिन्हें सचमुच इसकी जरूरत है। यह सिर्फ गरीब लोगों की दी जानी चाहिए।
अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक आईएमएफ के रुख से पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों की उससे जल्द कोई राहत मिलने की उम्मीद टूट गई है। इन अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तान आईएमएफ के कई वित्तीय और आर्थिक सुझावों पर अमल करने के लिए तैयार हो गया। साथ ही उसने यह शर्त पर भी मान ली की पाकिस्तानी मुद्रा की कीमत मोटे तौर पर बाजार के सिद्धांत से तय होगी। उधर बिजली शुल्क भी बढ़ाया गया। लेकिन इन उपायों से आईएमएफ संतुष्ट नहीं हुआ है। इससे पाकिस्तान के अधिकारियों में असंतोष पैदा हुआ है।
समझा जाता है कि चीन को ऋण संबंधी राहत पर मनाने में पाकिस्तान की नाकामी के कारण आईएमएफ ने अपना कर्ज रोक रखा है। आईएमएफ ने शर्त लगाई थी कि पाकिस्तान अपने द्विपक्षीय कर्जदाताओं से ऋण राहत संबंधी आश्वासन हासिल करे। पर्यवेक्षकों के मुताबिक चीन इसके लिए तैयार नहीं है। इसलिए पाकिस्तान सरकार के कई महत्त्वपूर्ण शर्तो पर राजी होने के बावजूद आईएमएफ का रुख सख्त बना हुआ है।