बांग्लादेश के मशहूर कपड़ा और वस्त्र उद्योग को अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। यह उद्योग मुख्य रूप से निर्यात पर आधारित है, लेकिन इसे विदेश से मिलने वाले ऑर्डर में गुजरे महीनों के दौरान भारी गिरावट आई है। इस बीच ऊर्जा की महंगाई और बढ़ी ब्याज दर के कारण कर्ज के बढ़े बोझ से भी इस उद्योग की कमर टूट गई है। खबरों के मुताबिक घाटा होने की गहराती आशंका के बीच कई कपड़ा मिल मालिक अपने कारखाने को लीज पर दे देने पर विचार कर रहे हैं।
कारोबार से जुड़े लोगों के मुताबिक सबसे बड़ी समस्या यह सामने आई है कि पश्चिमी देशों से मांग लगातार घट रही है। ऐसे में कारखानों में पहले जितना उत्पादन जारी रखना मुश्किल होता जा रहा है। इसीलिए मिल मालिक ऐसे लोगों की तलाश में हैं, जो उनके कारखानों को खरीद सकें। मसलन, सावर स्थित रोज गार्डेन कारखाने के मालिक महफुजुर रहमान पिछले कई महीनों से कारखाने के खरीदार की तलाश में हैं। इस बीच वे अपने कारखाने की कीमत एक चौथाई तक घटा चुके हैं। उधर नारायणगंज में 12 मंजिली इमारत में चलने वाले एक मिल के मालिक ने कारखाना बेचने का विज्ञापन दिया है।
बांग्लादेश के अखबार द बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेश के राष्ट्रीय अखबारों में आजकल ऐसे इश्तहार रोजमर्रा के स्तर पर देखने को मिल रहे हैं। खरीदारों की तलाश में जुटे मिल मालिकों की संख्या दर्जनों में पहुंच चुकी है। बिक्री ना होने की स्थिति में वे कारखाने को लीज पर देने के इश्तहार भी छपवा रहे हैं। दूसरी तरफ कई कारखाने बंद हो चुके हैं और उनमें काम करने वाले कर्मचारी बेरोजगार हो चुके हैं।
मशहूर डायर्ड ग्रुप अपने तीन कारखानों को बंद कर चुका है। इस कंपनी को दुनिया भर से कपड़ा, परिधान, इंजीनियरिंग उत्पाद, सॉफ्टवेयर और कृषि उत्पादों के लिए ऑर्डर मिलते थे। लेकिन इस कंपनी समूह ने पिछले महीने अपने तीन कारखाने बंद किए, जहां आठ हजार कर्मचारियों की नौकरी चली गई।
उद्योग संगठनों का कहना है कि उनके पास बंद हो चुके या बिक्री की कोशिश में लगे कारखानों की सही संख्या उपलब्ध नहीं है। लेकिन बांग्लादेश निटवियर मैनुफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष फजलुल हक ने द बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा- ‘अनेक फैक्टरी मालिक अपने कारखाने बेचना या किराए पर देना चाहते हैं। लेकिन कोई खरीदार मिल नहीं रहा है। कारण यह है कि कारोबारी चाहे छोटा हो या बड़ा, उसे अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।’
पैसिफिक जींस ग्रुप नाम की कंपनी के प्रबंध निदेशक सईद एम तनवीर के मुताबिक उन्हें रोज ऐसे कई मिल मालिकों के कई फोन आते हैं, जो अपने कारखाने को बेचने की कोशिश में जुटे हुए हैं। तनवीर ने कहा- ‘कारखानों को किराए पर देना अक्सर उसे बंद करने की दिशा में पहला कदम होता है। जो कारखाने एक्सपोर्ट प्रोमोशन जोन में हैं, उन्हें भी अपना उत्पादन घटाना पड़ा है। ये कारखाने मजदूरों की छंटनी कर रहे हैं। बहुत खतरनाक स्थिति हमारे सामने आ गई है।’