अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव धड़े का हनीमून खत्म हो गया है। इस बात के संकेत हाल की तमाम घटनाओं से मिले हैं। अब कांग्रेस (संसद) प्रोग्रेसिव के सदस्य और प्रोग्रेसिव ग्रासरूट संगठन खुल कर राष्ट्रपति बाइडन की प्राथमिकताओं पर सवाल उठा रहे हैं। वोटिंग राइट्स बिल, पुलिस सुधार, इन्फ्रास्ट्रक्चर पैकेज पर राष्ट्रपति का मध्यमार्गी रुख, और कई दूसरे मुद्दों पर इन समूहों का असंतोष बढ़ गया है।
हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव के प्रोग्रेसिव गुट से जुड़े सदस्य मॉनडेयर जोन्स ने वेबसाइट पॉलिटिको.कॉम से कहा- ‘बाइडन दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति हैं। उनके पास वे तमाम संसाधन हैं, जिनसे वे अपनी पार्टी के किसी सदस्य की बात सुन सकते हैँ। इन बातों का संबंध लोकतंत्र की रक्षा जैसे बुनियादी मुद्दे से है।’ जोन्स ने ये टिप्पणी वोटिंग राइट्स बिल के सीनेट में नाकाम हो जाने के बाद की। जोन्स ने कहा कि राष्ट्रपति को अब अधिक आक्रामक रुख अपनाना चाहिए।
जोन्स जैसी ही राय प्रोग्रेसिव धड़े के ज्यादातर सदस्यों की भी है। गौरतलब है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर प्रोग्रेसिव्स एक मजबूत ताकत के रूप में उभरे हैं। कांग्रेस के दोनों सदनों में उनकी महत्वपूर्ण मौजूदगी है। उधर जमीनी स्तर पर भी उनका प्रभाव बढ़ा है। बीते मंगलवार को न्यूयॉर्क राज्य के बफेलो में मेयर पद के लिए हुई प्राइमरी (पार्टी उम्मीदवार चुनने की प्रक्रिया) में खुद को सोशलिस्ट कहने वाली ब्लैक कार्यकर्ता इंडिया वालटन ने डेमोक्रेटिक पार्टी के एक दिग्गज नेता को हरा दिया। वालटन का समर्थन सीनेटर बर्नी सैंडर्स और उनके दूसरे समर्थकों ने किया था।
प्रोग्रेसिव नेताओं ने कहा है कि वोटिंग राइट्स पर बाइडन द्विपक्षीय सहमति बनाने में जुटे रहे। जबकि उन्हें डेमोक्रेटिक पार्टी के दक्षिणपंथी सदस्यों जो मेंचिन और क्रिस्टीन सिनेमा के रुख का अंदाजा पहले ही लगा लेना चाहिए था। कांग्रेस के प्रोग्रेसिव कॉकस की प्रमुख प्रमिला जयपाल ने कहा- ‘राष्ट्रपति को प्रमुख डेमोक्रेट नेताओं के साथ अपने निजी संबंध का उपयोग करना चाहिए। उन्हें समझाना चाहिए कि यह द्विपक्षीय सहमति का मुद्दा नहीं है।’
जयपाल ने कहा कि बाइडन चाहें तो डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं को समझा सकते हैं कि यह द्विपक्षीय सहमति का समय नहीं है। अब वक्त बदल गया है। हम ऐसे समय में पहुंच गए हैं कि अगर हमने वोटिंग राइट्स बिल पारित नहीं किया, तो हमारा लोकतंत्र नहीं बचेगा। साफ है, जयपाल ने ये बिल पारित ना होने की जिम्मेदारी जो बाइडन पर डाली।
प्रोग्रेसिव संगठन मूवऑन की कार्यकारी निदेशक रहाना एप्टिंग ने वेबसाइट पोलिटिको से कहा- ‘आप देख रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी यात्राओं का कार्यक्रम घोषित कर दिया है। उस दौरान वे क्या कहेंगे। वे झूठी कहानियां फैलाएंगे कि डेमोक्रेटिक पार्टी हर जगह चुनावी धांधली कर रही है। इसलिए जरूरत इस बात की है कि बाइडन संभल-संभल कर न चलें। हम चाहते हैं कि वे आक्रामक रुख अपनाएं। हम चाहते हैं कि जिन लोगों ने उन्हें वोट दिया उनकी वे नुमाइंदगी करें। लेकिन अब तक हमने नहीं देखा है कि ये बाइडन की प्राथमिकता है।’
ऐसा लगता है कि प्रोग्रेसिव धड़ों की तरफ से हो रही आलोचना पर व्हाइट हाउस का ध्यान गया है। गुरुवार को अधिकारियों ने कई सिविल राइट्स और प्रोग्रेसिव संगठनों से संपर्क किया। उनसे आग्रह किया कि वे उप राष्ट्रपति कमला हैरिस से मिलें और लोकतंत्र के लिए पैदा हो रहे खतरों पर उनसे चर्चा करें। पिछले हफ्ते भी व्हाइट हाउस ने ऐसे कुछ संगठनों से संपर्क किया था। गौरतलब है कि राष्ट्रपति बनने के बाद बाइडन प्रोग्रेसिव सांसदों और समूहों के साथ संपर्क में रहे हैं। उन्होंने एक परंपरा शुरू की है जिसके तहत हर पखवाड़े ऐसे 60 समूहों के साथ व्हाइट हाउस के अधिकारी बैठक करते हैं। लेकिन अब ये उपाय बेअसर साबित होने लगे हैं। अब प्रोग्रेसिव धड़ा राष्ट्रपति से निर्णायक रुख अपनाने की मांग कर रहा है।