इसके बारे में विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा, ‘हम ऐसा कानून नहीं चाहते हैं, जो हर कारोबार को संदेह की नजर देख रहा हो। कुल मिलाकर इस सरकार का ऐसा कोई इरादा नहीं है।’ उन्होंने कहा कि यह सरकार की उन पहलों में से एक है, जो भारत को 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था में तब्दील करने की दिशा में उठाई जा रही हैं। इसके माध्मय से सरकार और कारोबारियों के बीच भरोसा सुनिश्चित होगा।
लगातार घट रहा है एनपीए
इससे पहले एक श्रोता ने पूछा कि सरकार भारी एनपीए यानी फंसे कर्जों वाले बैंकों में पैसा लगा रही है, तो वित्त मंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था में आवश्यक कार्यों के लिए बैंकों का होना जरूरी है। सीतारमण ने कहा कि एक समय एनपीए लगभग 10 लाख करोड़ रुपये था।
उन्होंने कहा, ‘अब यह घटकर 8 लाख करोड़ रुपये रह गया है और यह लगातार कम हो रहा है। जब हम एनपीए की बात कर रहे हैं और पैसा बैंकों को दिया जा रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं कि बैंकों को इसकी जरूरत नहीं है। हम उन लोगों का भी पीछा कर रहे हैं, जो बैंकों का पैसा नहीं चुका रहे हैं और जिनकी वजह से बैंकों की यह हालत हुई है। हम उनसे पैसा वापस लेंगे।’