अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चुनाव हारने के बाद जैसा व्यवहार कर रहे हैं, उससे अब अमेरिका के टॉप सिक्योरिटी एक्सपर्ट भी चिंतित हो गए हैं। सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) के पूर्व निदेशक जॉन ब्रेनन ने कहा है कि रक्षा मंत्रालय में जिस तरह ट्रंप अपने वफादारों की नियुक्ति कर रहे हैं, उससे देश की सुरक्षा से जुड़ी अहम खुफिया जानकारियां लीक हो सकती हैं।
उन्होंने चुनाव नतीजों को चुनौती देने के ट्रंप के आचरण को अमेरिका के दीर्घकालिक हितों के लिए खतरा बताया। ब्रेनन ने कहा कि इससे समाज बंट रहा है। साथ ही रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान जैसे अमेरिका विरोधी देशों को अमेरिका की कमजोरी का पता चल रहा है।
टीवी चैनल सीएनएन को दिए इंटरव्यू में ब्रेनन ने उप-राष्ट्रपति माइक पेंस को सलाह दी है कि वे संविधान के 25वें संशोधन का इस्तेमाल करते हुए ट्रंप को राष्ट्रपति पद से हटा दें। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्री मार्क एस्पर को विवादास्पद ढंग से हटाए जाने के बाद ट्रंप का राष्ट्रपति बने रहना उचित नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि अभी ट्रंप 70 दिन से भी ज्यादा समय तक अपने पद पर रहेंगे और इस दौरान वे देश को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं।
अमेरिकी मीडिया में छपी खबरों के मुताबिक विदेशी नेताओं की तरफ से नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन के लिए आए संदेशों को विदेश मंत्रालय उन तक नहीं पहुंचा रहा है। बाइडन भी यह कह चुके हैं कि उनकी विश्व नेताओं से जो बात हुई है, वह अमेरिकी विदेश मंत्रालय के माध्यम से नहीं हुई। बाइडन ने अपने स्तर पर जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो नेताओं से बातचीत की।
शुरुआत में हार स्वीकार ना करने के ट्रंप के रुख को ज्यादा गंभीरता से नहीं लिया गया। तब इसे ट्रंप के अस्थिर व्यवहार से जोड़कर देखा गया। लेकिन अब ये समझ बन रही है कि ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी शांतिपूर्ण सत्ता हस्तांतरण को बाधित करने के लिए किसी हद तक जाने को तैयार हैं। खासकर विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैककॉनेल के बयानों ने देश में चिंता बढ़ा दी है।
पोम्पियो ने एक संवाददाता के सवाल पर कहा था कि सत्ता का सहज हस्तांतरण दूसरे ट्रंप प्रशासन के हाथों में होगा। मैककॉनेल ने राष्ट्रपति के रुख का समर्थन किया। कहा कि चुनाव नतीजों को चुनौती देने और अंत तक अपनी साबित करने की कोशिश करने का ट्रंप को पूरा अधिकार है। रिपब्लिकन पार्टी के दूसरे प्रमुख नेता भी इस मामले में ट्रंप के साथ दिखते हैं। इससे ये अंदाजा गलत साबित हो गया है कि हार के बाद ट्रंप को समर्थन करने वाले कम लोग बचेंगे।
मगर अब सूरत यह है कि चुनाव नतीजा आने के छह दिन बाद भी ट्रंप ने जो बाइडन से संपर्क नहीं किया है। अमेरिकी संविधान में चुनाव और नए राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण में लगभग पौने तीन महीने का समय इसलिए रखा गया था, ताकि नव निर्वाचित नेता सत्ता की बारीक जानकारियों और तमाम तरह की सूचनाओं से इस बीच परिचित हो जाए। लेकिन ट्रंप प्रशासन अब तक बाइडन को खुफिया जानकारियां देने से इनकार कर रहा है।
सुरक्षा विशेषज्ञों ने कहा है कि यह इसलिए और भी आश्चर्यजनक है क्योंकि बाइडन पहले आठ साल तक उप राष्ट्रपति रह चुके हैं। तब उनकी तमाम सूचनाओं तक पहुंच थी। इसलिए उनके मामले में सिक्योरिटी क्लीयरेंस जैसी शर्तें पूरी होने की जरूरत भी नहीं है।