अमेरिकी संसद में ट्रंप समर्थकों का प्रदर्शन
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दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक ओछी हरकत ने उनके मुल्क के नाम पर धब्बा लगा दिया है। चुनाव हार चुके ट्रंप लगातार लोकतांत्रिक व्यवस्था पर चोट करते रहे। चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए, अदालत भी गए। क्योंकि वो अपनी हार को पचा नहीं पा रहे हैं।
ट्रंप ऐसे शरारती बच्चे की तरह हरकतें कर रहे हैं, जो क्रिकेट तो खेलता है, पर आउट होने पर बल्ला लेकर चल देता है, जिससे कोई और न खेल सके। उन्होंने अमेरिकी संसद यानी कैपिटल बिल्डिंग जाने से पहले अपने समर्थकों को उकसाया और इतिहास की एक ऐसी घटना को अंजाम दे दिया, जिसे भुलाना आसान नहीं होगा।
इसे आप सत्ता का लालच भी कह सकते हैं और अतिआत्मविश्वास से भरा हुआ तानाशाही रवैया भी। लेकिन किसी भी सूरत में यह स्वीकार्य नहीं हो सकता। किसी भी लोकतांत्रिक देश का सम्मान होता है उसका संसद भवन। बहरहाल हम आपको बताने जा रहे हैं उन देशों के बारे में जहां की संसदों में ऐसी घटनाएं हुईं।
इराक की संसद में घुस गए थे हथियार बंद प्रदर्शनकारी
साल 2016 में इराक की संसद में शिया प्रदर्शनकारियों ने हिंसक प्रदर्शन किया था। यह प्रदर्शन सरकार के गठन को लेकर संसद की बंदी को लेकर हुआ था। संसद में घुसकर हथियार लिए प्रदर्शनकारी प्रस्तावित कैबिनेट में दोबारा बदलाव किए जाने की मांग कर रहे थे। ये प्रर्शनकारी शिया मौलवी मुक्तदा अल-सद्र के समर्थक थे।
लीबिया में भी प्रदर्शन, अफगानिस्तान में जानलेवा हमला
साल 2014 में लीबिया में बंदूकधारी हमलावरों ने संसद में हंगामा मचाया था। ये हमलावर जनरल खलीफा हफ्तार के समर्थक थे। साल 2015 में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबान ने वहां की संसद में जानलेवा हमला किया था। साल 2013 में, इजिप्ट (मिस्र) में भीड़ ने मोहम्मद मोरसी को सत्ता से हटाया था।
कनाडा: संसद में गोलीबारी, बाल-बाल बचे थे प्रधानमंत्री
अक्तूबर 214 में कनाडा की संसद पर एक हथियारबंद व्यक्ति ने हमला कर दिया था। यह गोलीबारी तब हुई थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर संबोधन दे रहे थे। इस दौरान एक सैनिक की गोली लगने से मौत हो गई थी। हमलावर को ढेर कर दिया गया था और हार्पर को सुरक्षित रूप से दूसरे स्थान पर भेज दिया गया था।