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PM Modi: पीएम मोदी पर नस्लीय कार्टून बनाने पर विवाद; निशाने पर आया नॉर्वे का अखबार, जानें सबकुछ

Wed, 20 May 2026 09:17 AM IST
रिया दुबे वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

प्रधानमंत्री मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब नॉर्वे के अखबार Aftenposten ने पीएम मोदी को सपेरे के रूप में दिखाने वाला कार्टून प्रकाशित किया। इसे लेकर सोशल मीडिया पर नस्लीय सोच और प्रेस स्वतंत्रता को लेकर बहस छिड़ गई।
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नॉर्वे का अखबार निशाने पर - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के दौरान प्रेस स्वतंत्रता को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया। इसी बीच नॉर्वे के प्रमुख अखबार Aftenposten में प्रकाशित एक कार्टून सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसने नए विवाद को जन्म दे दिया। इस कार्टून में पीएम मोदी को सपेरे के रूप में दिखाया गया था, जिसे लेकर कई लोगों ने अखबार पर नस्लीय और रूढ़िवादी सोच को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
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कार्टून में क्या दिखाया गया?

यह कार्टून पीएम मोदी के ओस्लो पहुंचने से महज कुछ घंटे पहले प्रकाशित किया गया था। इसे अखबार के एक ओपिनियन आर्टिकल के साथ छापा गया, जिसकी हेडलाइन का अनुवाद एक चतुर लेकिन परेशान करने वाला व्यक्ति बताया गया। लेख में इस बात पर चर्चा की गई थी कि भारत की नजर नॉर्डिक देशों पर क्यों है। वहीं कार्टून में मोदी को सपेरे के रूप में दिखाया गया, जबकि सांप की जगह पेट्रोल पंप की फ्यूल पाइप दिखाई गई थी।

सोशल मीडिया पर आई तीखी प्रतिक्रिया

कार्टून सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई यूजर्स ने इसे भारत की पुरानी और अपमानजनक पश्चिमी छवि से जोड़कर देखा। लंबे समय तक पश्चिमी मीडिया में भारत को 'सांप सपेरों, हाथियों और अंधविश्वासों का देश' बताने वाली छवियों का इस्तेमाल होता रहा है। स्नेक चार्मर यानी सांप सपेरा वाली छवि को हाल के वर्षों में कई विशेषज्ञों और आलोचकों ने नस्लीय और जेनोफोबिक प्रतीक करार दिया है।

विदेशी मीडिया में अक्सर दिखाई देती है नस्लीय सोच

यह पहला मौका नहीं है जब किसी विदेशी मीडिया संस्थान ने भारत को इस तरह दर्शाया हो। अक्तूबर 2022 में स्पेन के अखबार La Vanguardia ने भारत की आर्थिक तरक्की को दिखाने के लिए सांप सपेरे की तस्वीर का इस्तेमाल किया था। उस समय भी इस चित्रण को लेकर काफी आलोचना हुई थी।

पीएम मोदी ने नस्लीय सोच के खिलाफ की थी टिप्पणी

खास बात यह है कि पीएम मोदी खुद भी पहले इस मुद्दे पर टिप्पणी कर चुके हैं। 2014 में अमेरिका दौरे के दौरान उन्होंने कहा था कि भारत अब स्नेक चार्मर्स का देश नहीं, बल्कि माउस चार्मर्स का देश बन चुका है। उनका इशारा कंप्यूटर माउस और भारत की तकनीकी प्रगति की ओर था। इससे पहले जनवरी 2013 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए गांधीनगर में आयोजित वाइब्रेंट गुजरात युवा सम्मेलन में भी उन्होंने कहा था कि दुनिया की नजर में भारत की छवि सांप सपेरों के देश से बदलकर तकनीक और नवाचार वाले देश की बन रही है।

क्या है पूरा मामला?

इसी दौरान नॉर्वे में प्रेस स्वतंत्रता को लेकर भी एक अलग विवाद सामने आया। पीएम मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे के संयुक्त बयान के दौरान एक पत्रकार ने पीएम मोदी से सवाल पूछने की कोशिश की, लेकिन पीएम बिना सवाल लिए वहां से निकल गए।

इसके बाद नॉर्वे की पत्रकार और कमेंटेटर हेले लिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा किया। वीडियो में पीएम मोदी संयुक्त बयान के बाद मंच से जाते दिखाई देते हैं। पोस्ट में पत्रकार ने लिखा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरा सवाल नहीं लिया, हालांकि मुझे इसकी उम्मीद भी नहीं थी। वीडियो में वह जोर से यह कहते हुए भी सुनाई दीं दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवालों का जवाब क्यों नहीं देते?
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गौरतलब है कि नॉर्वे इस समय वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में पहले स्थान पर है, जबकि भारत की रैंकिंग 154 से गिरकर 157 पर पहुंच गई है। इसी मुद्दे ने बाद में भारतीय विदेश मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में भी बहस का रूप ले लिया।

विदेश मंत्रालय की प्रेस वार्ता के दौरान हेले लिंग ने भारत में कथित मानवाधिकार उल्लंघन और प्रेस स्वतंत्रता के मुद्दों का जिक्र करते हुए सवाल किया कि नॉर्वे भारत पर भरोसा क्यों करे। इसके जवाब में भारतीय राजनयिक सिबी जॉर्ज ने कहा कि भारत एक विश्वसनीय और भरोसेमंद साझेदार है। उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक परंपरा और हजारों वर्षों पुरानी सभ्यतागत विरासत का हवाला देते हुए कहा कि यही भारत की विश्वसनीयता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
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