उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन
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उत्तर कोरिया ने शनिवार को कहा कि उसने एक नए टॉरपीडो सिस्टम का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है, जो लक्ष्य का पता लगाने और दिशा-निर्देशन (गाइडेंस) के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करता है। कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (केसीएनए) ने बताया कि गुरुवार को जिस हथियार का परीक्षण किया गया, वह 'जैम-2.0' नाम का एक बेहद तेज गति वाला और सटीक गाइडेड टॉरपीडो सिस्टम है। हालांकि, इसमें यह नहीं बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से उनका क्या तात्पर्य है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस परीक्षण से हथियार के प्रोपल्शन सिस्टम (आगे बढ़ाने वाली प्रणाली) की पुष्टि हुई है, जिसे पिछले पांच वर्षों में 180 से अधिक परीक्षणों के जरिए विकसित किया गया था। दक्षिण कोरिया की सेना, जो अक्सर उत्तर कोरिया पर अपनी सैन्य तकनीकों को बढ़ा-चढ़ाकर बताने का आरोप लगाती है, ने केसीएनए की इस रिपोर्ट पर तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की।
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बता दें कि हाल के हफ्तों में उत्तर कोरिया ने हथियारों के प्रदर्शन को तेज कर दिया है। इसमें लगभग तीन वर्षों में पहली बार पानी के भीतर से मिसाइल लॉन्च करने का परीक्षण भी शामिल है। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने बैलिस्टिक मिसाइलों के विकास पर कई साल बिताने के बाद अब अपना ध्यान नौसैनिक क्षमताओं की ओर केंद्रित कर दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुधवार को किए गए मिसाइल परीक्षणों में संभवतः एक ऐसी पनडुब्बी शामिल थी जिसे अभी तक तैनात नहीं किया गया है; प्योंगयांग के अनुसार, इसे परमाणु हथियार लॉन्च करने के लिए डिजाइन किया गया है।
उत्तर कोरिया का क्या है उद्देश्य?
उत्तर कोरिया ने 20 सितंबर और तीन अक्तूबर को अलग-अलग रेंज वाली हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणालियों का भी परीक्षण किया। इसका मकसद अपने हथियारों के जखीरे को बढ़ाना है, ताकि दक्षिण कोरिया और जापान की मिसाइल रक्षा प्रणालियों को नाकाम किया जा सके। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बहन, किम यो जोंग ने दावा किया कि तीन अक्तूबर को परीक्षण की गई मिसाइलों में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।
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विशेषज्ञों का क्या कहना है?
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही उत्तर कोरिया अपने गाइडेंस सॉफ्टवेयर में सुधार कर रहा हो, लेकिन इस बात पर संदेह है कि उनके हथियारों में वास्तव में 'ऑटोनॉमस टारगेट डेजिग्नेशन' (स्वचालित रूप से लक्ष्य तय करने) जैसी उन्नत डिजिटल क्षमताएं मौजूद हैं। हाल के वर्षों में किम जोंग उन ने दक्षिण कोरिया के साथ सभी तरह की कूटनीति और सहयोग को रोक दिया है और उसे अपना 'स्थायी दुश्मन' करार दिया है। वहीं, वाशिंगटन के साथ परमाणु वार्ता को लेकर कई साल से चला आ रहा गतिरोध अभी भी जारी है।