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North Korea: किम जोंग उन ने बढ़ाई दुनिया की चिंता, नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने की तैयारी

Wed, 24 Jun 2026 07:54 AM IST
नितिन गौतम पीटीआई, प्योंगयांग

सार

उत्तर कोरिया ने बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम में खासी तरक्की के बाद अब अपनी नौसेना को मजबूत करना शुरू कर दिया है। उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं। माना जा रहा है कि इससे उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया में तनाव बढ़ सकता है। 
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किम जोंग उन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उत्तर कोरिया ने 5,000 टन क्षमता वाले एक नए विध्वंसक युद्धपोत को आधिकारिक तौर पर नौसेना में शामिल कर लिया है। देश के नेता किम जोंग उन ने इसे उत्तर कोरिया की बढ़ती नौसैनिक और परमाणु क्षमताओं का प्रतीक बताया है। सरकारी मीडिया की बुधवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, प्योंगयांग समुद्री क्षेत्र में अपनी सैन्य शक्ति के विस्तार की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
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युद्धपोत को नौसेना में किया गया शामिल
उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए के मुताबिक, किम जोंग उन ने मंगलवार को पश्चिमी बंदरगाह शहर नाम्पो में आयोजित कमीशनिंग समारोह में कहा कि 'चोए ह्योन' नामक युद्धपोत इस बात का प्रमाण है कि नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने की योजना निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है। केसीएनए ने बताया कि समारोह के बाद चोए ह्योन को औपचारिक रूप से उत्तर कोरियाई नौसेना में शामिल कर लिया गया और इसे देश के पश्चिमी तट की रक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

रूस ने की युद्धपोत बनाने में मदद
अप्रैल 2025 में इस युद्धपोत का अनावरण करने के बाद से इसके ट्रायल चल रहे थे। केसीएनए के अनुसार, यह युद्धपोत वायु रक्षा और पोत-रोधी हथियारों के अलावा परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों सहित कई उन्नत प्रणालियों से लैस है। हालांकि दक्षिण कोरिया के अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि यह पोत रूस की सहायता से तैयार किया गया है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का संकेत है। 
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तैनाती से पहले उत्तर कोरिया ने हाल के महीनों में चोए ह्योन का कई चरणों में परीक्षण किया, जिनमें पोत से परमाणु क्षमता वाली बताई गई क्रूज मिसाइलों का प्रक्षेपण भी शामिल था। समारोह में अपने संबोधन के दौरान किम ने कहा, 'वह दौर अब बीत चुका है जब हमारी नौसेना केवल अपने तटीय जलक्षेत्र की रक्षा तक सीमित थी। नौसेना अब रणनीतिक क्षमताओं से लैस एक पूर्ण सैन्य बल के रूप में विकसित हो रही है और इसे परमाणु हथियारों से लैस करने की योजना बिना किसी बाधा के आगे बढ़ रही है।'

बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के बाद अब नौसेना को मजबूत करने पर फोकस
बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को वर्षों तक प्राथमिकता देने के बाद किम अब नौसैनिक क्षमताओं के विस्तार पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। इसमें परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बी के निर्माण की परियोजना भी शामिल है। फरवरी में वर्कर्स पार्टी की कांग्रेस में प्रस्तुत उनकी पांच वर्षीय सैन्य योजना में भी नौसैनिक शक्ति को प्रमुख महत्व दिया गया था। इस योजना में पानी के भीतर से प्रक्षेपित किए जा सकने वाले अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) विकसित करने का लक्ष्य भी शामिल है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि उत्तर कोरिया जल्द ही एक नई समुद्री सीमा घोषित कर सकता है, जो दक्षिण कोरिया के नियंत्रण वाले जलक्षेत्र से टकराव पैदा कर सकती है।

दक्षिण कोरिया से तनाव बढ़ने की आशंका
दोनों कोरियाई देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच किम जोंग उन कई बार कह चुके हैं कि वे पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में मौजूद नॉर्दर्न लिमिट लाइन (NLL) को मान्यता नहीं देते। यह समुद्री सीमा 1950-53 के कोरियाई युद्ध के बाद अमेरिका के नेतृत्व वाले संयुक्त राष्ट्र कमान द्वारा निर्धारित की गई थी। दोनों देशों के बीच अतीत में इस विवादित सीमा पर कई घातक झड़पें हो चुकी हैं।

मंगलवार के भाषण में किम ने कहा कि एक अन्य युद्धपोत कांग कोन भी जल्द ही नौसेना में शामिल कर लिया जाएगा। इसके अलावा उत्तर कोरिया 10,000 टन क्षमता वाले एक और बड़े विध्वंसक युद्धपोत के निर्माण की योजना पर भी काम कर रहा है। 2019 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ परमाणु कूटनीति विफल होने के बाद से किम जोंग उन ने अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम का तेजी से विस्तार किया है और रूस तथा चीन के साथ संबंधों को और मजबूत बनाया है।
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