उत्तर कोरिया ने बुधवार को एक बार फिर उकसावे वाली कार्रवाई करते हुए समुद्र की ओर कई शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह लगातार दो दिनों में दूसरा मिसाइल परीक्षण है, जिसने कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव और बढ़ा दिया है।
दक्षिण कोरिया की सेना के अनुसार, ये मिसाइलें उत्तर कोरिया के पूर्वी तटीय शहर वॉनसान इलाके से दागी गईं और करीब 240 किलोमीटर तक उड़ान भरते हुए पूर्वी समुद्री क्षेत्र में गिरीं। इसके कुछ ही समय बाद एक और बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च की पुष्टि हुई, हालांकि उसके बारे में विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई।
दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने कहा कि देश अमेरिकी गठबंधन के साथ मिलकर किसी भी उकसावे का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। मंगलवार को भी उत्तर कोरिया ने एक संदिग्ध प्रोजेक्टाइल लॉन्च किया था, जिसे लेकर माना जा रहा है कि वह शुरुआती चरण में ही फेल हो गया। दक्षिण कोरियाई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मिसाइल रडार से अचानक गायब हो गई थी, जो तकनीकी गड़बड़ी की ओर इशारा करता है।
रिश्तों में सुधार की उम्मीदों पर ठंडा पानी
लगातार हो रहे इन परीक्षणों से पहले उत्तर कोरिया ने साफ कर दिया था कि वह दक्षिण कोरिया के साथ रिश्ते सुधारने के मूड में नहीं है। दक्षिण कोरिया की सरकार जहां बातचीत बहाल करने की कोशिश कर रही है, वहीं प्योंगयांग की ओर से तीखी बयानबाजी जारी है। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी जांग कुम चोल ने दक्षिण कोरिया को “सबसे शत्रुतापूर्ण देश” बताया और उसकी शांति की उम्मीदों का मजाक उड़ाया। उन्होंने दक्षिण कोरिया को भ्रम में जीने वाला करार दिया।
किम यो जोंग के बयान पर भी विवाद
इससे पहले उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन की बहन किम यो जोंग ने दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग के एक बयान की तारीफ की थी, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी थी कि अगर ड्रोन गतिविधियां दोहराई गईं तो कड़ा जवाब दिया जाएगा। हालांकि, दक्षिण कोरिया ने इसे रिश्तों में सुधार का संकेत माना, लेकिन उत्तर कोरिया ने बाद में स्पष्ट किया कि यह केवल चेतावनी थी, कोई नरमी नहीं।
परमाणु कार्यक्रम और बढ़ती चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया लगातार अपने मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम को मजबूत कर रहा है। हाल ही में किम जोंग उन ने एक उन्नत सॉलिड-फ्यूल इंजन के परीक्षण का निरीक्षण किया, जिसे देश की सैन्य क्षमता में बड़ा कदम माना जा रहा है। सॉलिड-फ्यूल मिसाइलें तेजी से लॉन्च की जा सकती हैं और इन्हें छिपाना भी आसान होता है, जिससे इनका खतरा और बढ़ जाता है।
जानकारों के मुताबिक, उत्तर कोरिया मल्टी-वारहेड इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने की कोशिश कर रहा है, ताकि अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणाली को भेद सके। हालांकि, इस तकनीक में उसकी पूरी महारत पर अभी भी सवाल बने हुए हैं।