उत्तरी कोरिया में कोविड-19 से संक्रमित मरीजों को 'क्वारंटीन कैंप' में रखा जा रहा है और उन्हें वहां भूख से मरने के लिए छोड़ दिया जा रहा है। यह दावा एक कार्यकर्ता ने किया है। ईसाई कार्यकर्ता टिम पीटर्स सियोल में एक चैरिटी 'हेल्पिंग हैंड्स कोरिया' चलाते हैं।
टिम का कहना है कि उत्तरी कोरिया में उनके सूत्रों ने दावा किया है कि ये कोरोनावायर, क्वारंटीन कैंप चीन की सीमा के पास स्थित शहरों में बनाए गए हैं। लेकिन, इन कैंप में लाए गए लोगों को अक्सर बिना चिकित्सकीय सहायता के भूखा मरने के लिए छोड़ दिया जाता है।
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार टिम ने कहा, 'हमें एक भयावह और चेताने वाली जानकारी मिली है जो बताती है कि उत्तर कोरिया की डीपीआरके सरकार ऐसे लोगों को न के बराबर भोजन या दवाइयां उपलब्ध करा रही है, जो वहां (क्वारंटीन कैंप में) लाए जा रहे हैं।'
टिम ने बताया कि भोजन और दवाइयों की व्यवस्था का जिम्मा कैंप में लाए गए परिवार के लोगों पर छोड़ दिया गया है। जो लोग दवाइयों और भोजन की व्यवस्था कर सकते हैं और इतनी दूर स्थित शिविरों तक आ सकते हैं तो वो आ रहे हैं, लेकिन बाकी अपने हाल पर हैं।
उन्होंने कहा, मेरे सूत्र बताते हैं कि इन शिविरों में रखे गए गई लोगों की मौत हो चुकी है। इन लोगों की मौत न केवल महामारी से हुई है बल्कि, इसके लिए भूख और इससे संबंधित कारण भी जिम्मेदार हैं। टिम ने उत्तर कोरिया में महामारी की स्थिति को भीषण करार दिया है।
पादरी डेविड ली के अनुसार उत्तर कोरिया छोड़ चुके लोग जो वहां अपने संबंधियों के संपर्क में हैं, बताते हैं कि जिनमें कोरोना के लक्षण दिखते हैं उन्हें जबरन आइसोलेशन में भेज दिया जाता है या उनके ही घर में बिना भोजन या अन्य सहायता के बंद कर दिया जाता है।
सियोल में उत्तर कोरियाई डिफेक्टर्स के साथ काम करने वाले डेविड ली कहते हैं कि उत्तर कोरियाई लोग कोरोना वायरस महामारी को 'घोस्ट डिसीज' कहते हैं। वहां कोरोना की जांच के लिए या संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए उचित टेस्ट किट तक मौजूद नहीं है।