इस खोज में हार्वी ऑल्टर ने ट्रांसफ्यूजन संबंधी हेपेटाइटिस का अध्ययन किया, जिनकी वजह से पता चला कि क्रॉनिक हेपेटाइटिस का एक सामान्य कारण एक अज्ञात वायरस था। वहीं, माइकल ह्यूटन ने हेपेटाइटिस सी वायरस के जीनोम को अलग करने के लिए एक नई तकनीक का इस्तेमाल किया। चार्ल्स राइस ने अंतिम साक्ष्य प्रदान किए कि हेपेटाइटिस सी वायरस अकेले हेपेटाइटिस का कारण बन सकता है।
85 वर्षीय हार्वी जे ऑल्टर का जन्म अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी में 12 सितंबर 1935 को हुआ था। 1956 में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ रोचेस्टर के कला में स्नातक की डिग्री ली थी। इसके बाद 1960 में उन्होंने उसी यूनिवर्सिटी से चिकित्सा की डिग्री ली। हेपेटाइटिस सी वायरस की खोज को संभव बनाने में अहम योगदान देने वाली उनकी खोजों के लिए उन्हें कई पुरस्कारों और सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
माइकल ह्यूटन का जन्म यूनाइटेड किंगडम में 1950 के दशक में हुआ था। 17 साल की आयु में लुई पाश्चर के बारे में पढ़ने के बाद उन्होंने माइक्रोबायोलॉजिस्ट बनने का फैसला किया था। कई पुरस्कारों से सम्मानित किए जा चुके ह्यूटन ने साल 1972 में यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्ट एंग्लिया से बायोलॉजिकल साइंसेज में डिग्री ली और साल 1977 में किंग्स कॉलेज लंदन से बायोकेमिस्ट्री में पीएचडी पूरी की थी।
चार्ल्स एम राइस का जन्म 25 अगस्त 1952 को सैक्रामेंटो में हुआ था। उन्होंने 1974 में यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया से प्राणि विज्ञान (जूलॉजी) से स्नातक किया था और 1981 में कैलिफोर्निया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से बायोकेमिस्ट्री में पीएचडी पूरी की थी, यहां उन्होंने आरएनए वायरसों पर अध्ययन किया था। वह साल 2003 से 2007 तक जर्नल ऑफ एक्सपेरिमेंटल मेडिसिन के एडिटर रहे।