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Nobel Prize: 'नोबेल पुरस्कार किसी और को नहीं दिया जा सकता', ट्रंप को पदक देने पर फाउंडेशन की माचाडो को दो टूक

Sun, 18 Jan 2026 08:08 PM IST
राहुल कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, स्टाकहोम

सार

वेनेजुएला की विपक्षी नेता और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरिना मचाडो पुरस्कार का पदक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सौंपने के बाद नोबेल फाउंडेशन ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि नोबेल पुरस्कार को किसी अन्य व्यक्ति को आधिकारिक रूप से दिया, साझा या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता। हालांकि, नोबेल को हस्तांतरित किए जाने का यह पहला मौका नहीं है। पहले भी नोबेल पुरस्कार बेचे व दान किए जाते रहे हैं।
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मचाडो ने ट्रंप को दिया अपना नोबेल पुरस्का - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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वेनेजुएला की नेता मारिया कोरिना माचाडो द्वारा अपना नोबेल शांति पुरस्कार का पदक संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को दिए जाने के कुछ दिनों बाद नोबेल फाउंडेशन की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। फाउंडेशन ने कहा है कि नोबेल पुरस्कार किसी अन्य व्यक्ति को 'प्रतीकात्मक रूप से' भी हस्तांतरित या सौंपा नहीं जा सकता है।

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मचाडो के फैसले पर फाउंडेशन का बयान
नोबेल फाउंडेशन ने स्पष्ट किया है कि उसका एक प्रमुख उद्देश्य नोबेल पुरस्कारों की गरिमा और उनके प्रशासन की रक्षा करना है। फाउंडेशन अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत और उसमें तय शर्तों का पूरी तरह पालन करता है। बयान में कहा गया है कि अल्फ्रेड नोबेल की वसीयत के अनुसार, पुरस्कार उन्हीं व्यक्तियों या संस्थाओं को दिया जाना चाहिए जिन्होंने मानवता को सबसे बड़ा लाभ पहुंचाया हो। साथ ही, वसीयत में यह भी साफ तौर पर तय किया गया है कि किस पुरस्कार को प्रदान करने का अधिकार किस संस्था के पास होगा।

नोबेल फाउंडेशन ने कहा कि इन नियमों के तहत किसी भी नोबेल पुरस्कार को न तो आगे सौंपा जा सकता है और न ही किसी और को दिया या वितरित किया जा सकता है। यह बात केवल औपचारिक ही नहीं, बल्कि प्रतीकात्मक रूप से भी लागू होती है। फाउंडेशन के अनुसार, एक बार जिस व्यक्ति या संस्था को नोबेल पुरस्कार प्रदान किया जाता है, वह सम्मान उसी के नाम से स्थायी रूप से जुड़ा रहता है और उसे किसी अन्य व्यक्ति को स्थानांतरित नहीं किया जा सकता।
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गुरुवार को सौंपा था अपना पदक
मारिया कोरिना मचाडो ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात के दौरान अपना नोबेल शांति पुरस्कार का पदक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सौंपा था। व्हाइट हाउस के एक अधिकारी के मुताबिक, ट्रंप यह पदक अपने पास रख सकते हैं। मुलाकात के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा कि मचाडो ने उनके कार्यों के सम्मान में यह पदक भेंट किया है। उन्होंने इसे आपसी सम्मान का अद्भुत प्रतीक बताया। 

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व्हाइट हाउस की ओर से जारी तस्वीर में ट्रंप और मचाडो साथ नजर आ रहे हैं। ट्रंप के हाथ में सुनहरे फ्रेम में जड़ा नोबेल शांति पुरस्कार का पदक है। पदक के साथ लगे संदेश में शांति, कूटनीति और स्वतंत्रता की रक्षा में ट्रंप के नेतृत्व की सराहना की गई है। यह ट्रंप और मचाडो की पहली आमने-सामने की मुलाकात भी थी, जो करीब एक घंटे चली। इसके बाद मचाडो ने कैपिटल हिल में रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों दलों के कई सीनेटरों से भी मुलाकात की।

पदक पर लिखा था ये संदेश
मचाडो ने पदक के साथ संदेश में लिखा, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए- शक्ति के माध्यम से शांति को बढ़ावा देने, कूटनीति को आगे बढ़ाने और स्वतंत्रता एवं समृद्धि की रक्षा करने में आपके असाधारण नेतृत्व के लिए कृतज्ञता के तौर पर। मचाडो द्वारा हस्ताक्षरित और 15 जनवरी 2026 को जारी संदेश में कहा गया है, यह राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा स्वतंत्र वेनेजुएला को सुरक्षित करने के लिए उठाए गए सैद्धांतिक और निर्णायक कदमों के प्रति कृतज्ञता के व्यक्तिगत प्रतीक के रूप में वेनेजुएला के लोगों की ओर से प्रस्तुत किया गया है। अमेरिका और उसके राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप के साहस को वेनेजुएला के लोग कभी नहीं भूलेंगे।

फाउंडेशन ने इस बारे में स्पष्ट करते हुए कहा, नोबेल शांति पुरस्कार के साथ दिया जाने वाला स्वर्ण पदक और डिप्लोमा केवल भौतिक प्रतीक होते हैं, जबकि असली सम्मान हमेशा उसी व्यक्ति या संस्था से जुड़ा रहता है, जिसे नॉर्वेजियन नोबेल समिति की ओर से विजेता घोषित किया गया हो। पदक, डिप्लोमा या पुरस्कार राशि का आगे क्या होता है, इससे यह तथ्य नहीं बदलता कि इतिहास में नोबेल शांति पुरस्कार का विजेता वही माना जाएगा, जिसका नाम आधिकारिक रूप से घोषित हुआ है। नोबेल पदक अठारह कैरेट सोने से बनाया जाता है। इसका वजन लगभग एक सौ छियानवे ग्राम और व्यास छह दशमलव छह सेंटीमीटर होता है। इसे वर्ष 1901 में नॉर्वे के मूर्तिकार गुस्ताव विगलैंड ने डिजाइन किया था। पदक के एक ओर अल्फ्रेड नोबेल की आकृति और दूसरी ओर शांति तथा राष्ट्रों के बीच भाईचारे का प्रतीक अंकित होता है।

नोबेल पुरस्कार का फैसला हमेशा के लिए मान्य रहता है
नोबेल शांति पुरस्कार पाने वाले को दो मुख्य प्रतीक मिलते हैं, एक स्वर्ण पदक और एक डिप्लोमा। इसके अलावा पुरस्कार राशि अलग से प्रदान की जाती है। नियमों के अनुसार, कोई भी विजेता न तो इस पुरस्कार को किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा कर सकता है और न ही इसे किसी को हस्तांतरित कर सकता है। नॉर्वेजियन नोबेल समिति का यह भी कहना है कि एक बार घोषित होने के बाद नोबेल शांति पुरस्कार कभी वापस नहीं लिया जा सकता और यह फैसला हमेशा के लिए मान्य रहता है।
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पहले भी इन विजेताओं ने दान किया है नोबेल पदक

  • नोबेल शांति पुरस्कार 2001 के विजेता कोफी अन्नान के निधन के बाद उनकी पत्नी नाने अन्नान ने फरवरी 2024 में उनका पदक और डिप्लोमा जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय को दान कर दिया।
  • वर्ष 1921 के शांति पुरस्कार विजेता क्रिश्चियन लूस लांगे का पदक 2005 से ओस्लो के नोबेल शांति केंद्र में प्रदर्शित है और यह नॉर्वे में सार्वजनिक रूप से रखा गया एकमात्र मूल शांति पुरस्कार पदक है।
  • वर्ष 2021 के नोबेल शांति पुरस्कार विजेता रूसी पत्रकार दिमित्री मुरातोव ने जून 2022 में अपना पदक बेचकर पूरी राशि यूक्रेन के शरणार्थी बच्चों के लिए संयुक्त राष्ट्र बाल कोष को दान कर दी।
  • भौतिकी के नोबेल विजेता डेविड थाउलेस के परिवार ने उनका पदक कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय को दान किया, ताकि वह छात्रों को प्रेरित कर सके।



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