डोनाल्ड ट्रंप-किम जोंग उन (फाइल फोटो)
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तीन दिन पहले ही नरमी के संकेत के बाद अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच तनातनी एक बार फिर बढ़ती दिखने लगी है। उत्तर कोरिया ने कहा कि ट्रंप और किम जोंग-उन के बीच परमाणु निरस्त्रीकरण वार्ता पर सहमति बनने के बावजूद अमेरिका अपने पुराने रुख पर अड़ा है। खबरों के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र संघ में उसके प्रतिनिधि ने आरोप लगाया कि अमेरिका पर उनके देश पर प्रतिबंध लगाने का जुनून सवार है।
हाल ही में रविवार को ट्रंप उत्तर कोरियाई धरती पर कदम रखने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने और अपने समकक्ष किम जोंग से एक घंटे बैठक की। लेकिन अब उत्तर कोरिया का बयान बताता है कि दोनों देश दोबारा तल्खी की तरफ बढ़ रहे हैं। दरअसल संयुक्त राष्ट्र में उत्तर कोरिया के दूत को इस बात पर आपत्ति है कि ट्रंप जिस वक्त दक्षिण कोरियाई यात्रा से ठीक पहले उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग को मुलाकात का न्योता दे रहे थे वहीं दूसरी तरफ अमेरिका, फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन संयुक्त राष्ट्र संघ को एक संयुक्त पत्र भेज रहे थे।
इस संयुक्त पत्र में इन देशों ने आरोप लगाया कि उत्तर कोरिया ने 2017 में तय की गई पेट्रोलियम आयात की सीमा का उल्लंघन किया है। पत्र में उत्तर कोरियाई प्रवासी कामगारों को उनके घर वापस भेजने की अपील भी की गई। उत्तर कोरियाई दूत ने कहा इस दोहरेपन को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
अमेरिकी कोशिशों से सतर्क रहना होगा
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका समेत चार देशों के लिखे संयुक्त पत्र के जवाब में उत्तर कोरिया के दूत ने कहा, ‘यूएन के सभी सदस्य देशों को कोरियाई प्रायद्वीप पर शांतिपूर्ण माहौल बिगाड़ने की सोची समझी इन अमेरिकी कोशिशों के प्रति सतर्क रहना होगा।’ उन्होंने कहा कि सभी समस्याओं के लिए रामबाण के रूप में प्रतिबंधों का इस्तेमाल करना बेहद हास्यास्पद है। फिलहाल उत्तर कोरियाई बयान पर अमेरिकी प्रतिक्रिया नहीं मिली है।