नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू की ने बुधवार को अंतरराष्ट्रीय अदालत में रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ म्यांमार के सैन्य अभियान को ‘नरसंहार इरादा’ कहे जाने से इनकार कर दिया। संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत के न्यायाधीशों को संबोधित करते हुए म्यांमार की नेता ने यह जरूर कहा कि, हो सकता है सेना ने ‘अधिक बल’ का इस्तेमाल किया हो लेकिन यह साबित नहीं होता कि देश में अल्पसंख्यक समूह का सफाया करने की कोशिश की गई।
पारंपरिक बर्मी पोशाक और बालों पर फूल लगाए हुई सू की ने कड़े शब्दों में कहा, ‘अफसोस है कि गांबिया ने अदालत के समक्ष हमारे रखाइन प्रांत की भ्रामक और अधूरी तस्वीर रखी है। वास्तव में 2017 में म्यांमार की सेना रोहिंग्या आतंकियों के हमले का जवाब दे रही थी।
हालांकि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून की अवहेलना के कुछ मामलों में सेना ने बल का अधिक इस्तेमाल किया हो या सेना आतंकियों और नागरिकों के बीच अंतर स्पष्ट नहीं कर सकी हो।
म्यांमार खुद इस मामले में सेना के ऑपरेशन की खामियों की जांच कर रहा है। निश्चित रूप से ऐसी परिस्थितियों में नरसंहार का इरादा एकमात्र कल्पना नहीं हो सकती।’ बता दें कि मुस्लिम बहुल अफ्रीकी देश गांबिया ने म्यांमार पर मुस्लिमों के नरसंहार का आरोप लगाया है।