यूनिवर्सिटी ऑफ मिसौरी के वैज्ञानिकों का कहना है कि जो लोग रात 11 बजे लेकर सुबह 7 बजे तक शिफ्ट में काम करते हैं उन लोगों को शिफ्ट वर्क स्लीप डिसऑर्डर की तकलीफ होती है। इसमें व्यक्ति नींद संबंधी तकलीफ से ग्रसित हो जाता है।
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सबसे खतरनाक ये है कि ऐसे लोगों के सड़क हादसे की चपेट में आने की आशंका अधिक होती है। ये खतरा 300 फीसदी तक बढ़ जाता है। यूनिवर्सिटी के सिविल एंड एन्वायर्मेंटल इंजीनियरिंग के प्रो. प्रवीण एदारा का कहना है कि इस दिक्कत का हल निकालने के लिए और काम करना होगा जिससे आने वाले समय में लोगों को बचाया जा सके।
वे कहते हैं कि रात्रि शिफ्ट करने वालों के लिए सड़क किनारे आराम की व्यवस्था, उनके साथ संदेशों के साथ संपर्क में रहने की व्यवस्था बनानी होगी जिससे इस तरह के हादसों को रोका जा सके।