Israel: एनजीओ शावेई इस्राइल ने एक संदेश में कहा, "स्टाफ सार्जेंट हैंघल बेनी मेनाशी समुदाय के एक हीरो थे, जिन्होंने इस्राइल के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। इस बीच, उन्होंने भाई, उनकी पत्नी औऱ दो बच्चें उन लोगों में से हैं, जो अभी भी आव्रजन की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं।"
इस्राइल के एक गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ने भारतीय मूल के एक सैनिक की मौत के बाद उसके परिवार को इस्राइल में बसने के लिए मदद देने की अपील की है। यह एनजीओ मणिपुर और मिजोरम से आए यहूदियों के लिए आव्रजन (इमिग्रेशन) में मदद करता है। इन भारतीय यहूदियों को बेनी मेनाशी कहा जाता है।
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स्टाफ सार्जेंट गेरी गिदियन हैंघल (24 वर्षीय) की इस महीने की शुरुआत में एक हमले में मौत हो गई थी। यह हमला वेस्ट बैंक की बीट एल बस्ती के पास असाफ जंक्शन में हुआ था, जिसमें साजिश के तहत एक वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी थी।
एनजीओ शावेई इस्राइल ने एक संदेश में कहा, "स्टाफ सार्जेंट हैंघल बेनी मेनाशी समुदाय के एक हीरो थे, जिन्होंने इस्राइल के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। इस बीच, उन्होंने भाई, उनकी पत्नी औऱ दो बच्चें उन लोगों में से हैं, जो अभी भी आव्रजन की अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे हैं।" इसमें आगे कहा गया, "हमें हैंघल के परिवार की मदद करनी चाहिए और उनकी याद को बलिदान को सबसे अच्छे तरीके से सम्मान देना चाहिए। इस्राइली सरकार को सभी बचे हुए बेनी मेनाशी को इस्राइल लाने के लिए कदम उठाने चाहिए।"
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संगठन ने कहा, "भारत में मौजूद सभी 5,000 बेनी मेनाशी इस्राइल में बसना चाहते हैं, उनको यहां बसने के लिए जल्द से जल्द अनुमति मिलनी चाहिए।" एनजीओ ने जनता से अपील की कि वे हैंघल के परिवार की मदद करें और उनके अन्य रिश्तेदारों को भी इस्राइल लाने में मदद करें।
शावेई इस्राइल का मकसद 'खोए और छिपे हुए' यहूदियों से दुनियाभर में संपर्क करना और उन्हें इस्राइल के लोगों और राज्य के साथ फिर से जोड़ना है। हैंघल नफ हागलिल के निवासी थे और इस्राइल की कफीर ब्रिगेट के नहशोन बटालियन के सैनिक थे। उनका अंतिम संस्कार बड़ी संख्या में समुदाय के लोगों की मौजूदगी में किया गया। वह 2020 में मणिपुर से इस्राइल आए थे। युद्ध के दौरा करीब 300 बेनी-मेनाशी युवा सेना में ड्यूटी पर तैनात हैं, जिनमें से अधिकांश लड़ाकू इकाइयों में सेवा दे रहे हैं।