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यहां छोटी बच्चियों के लिए बेची जा रहीं मेकअप किट, बढ़ रहा बाजार

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: Shilpa Thakur Updated Tue, 19 Feb 2019 03:24 PM IST

सार

  • मेकअप के खिलाफ शुरू हुआ था नारीवादी आंदोलन।
  • अब ब्यूटी इंडस्ट्री छोटे बच्चों को निशाना बना रही है।
  • बिना मेकअप के स्कूल नहीं जाते बच्चे।
  • मेकअप न करने वालों के साथ होता है गलत व्यवहार।
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मेकअप इंडस्ट्री अब छोटे बच्चों को निशाना बना रही हैं - फोटो : pexels.com


स्कूल में भी मेकअप करके जाना, सब्जी लेने के लिए मेकअप करके जाना  महिलाओं के लिए जरूरी है। बिना मेकअप के महिलाओं को नौकरी तक नहीं मिलती। यहां की महिलाओं ने मीटू अभियान के तहत इस बात का विरोध भी किया था। इसका मतलब ये कि यहां की महिलाएं अब जागरुक हो रही हैं और वह मेकअप नहीं करना चाहती। वह जैसी हैं वैसी ही दिखना चाहती हैं।

अब बच्चे बन रहे निशाना

यही वजह है कि यहां की ब्यूटी इंडस्ट्री अब छोटे बच्चों को निशाना बना रही हैं। महज 7 साल की बच्ची भी स्कूल जाने से पहले मेकअप करना नहीं भूलती। उनके लिए होमवर्क, यूनिफॉर्म जितने जरूरी हैं, उतना ही जरूरी मेकअप भी है। यहां रहने वाली 7 साल की एक बच्ची कहती है, "मेकअप मुझे सुंदर बनाता है।" 



वह ब्यूटी पार्लर भी जाती है। सुंदर कपड़े और हेयरबैंड के अलावा वह टच पर करती है और होठों पर लिपस्टिक लगाना भी नहीं भूलती।


बता दें कि दुनिया में सबसे अधिक कॉस्मेटिक सर्जरी दर दक्षिण कोरिया में है और सबसे बड़ा सौंदर्य प्रसाधनों का बाजार भी दक्षिण कोरिया को ही माना जाता है। पिछले वर्ष इस देश ने सौंदर्य बाजार के जरिये 13 बिलियन डॉलर की कमाई की थी।

अच्छा दिखना बेहद अहम

दक्षिण कोरियाई समाज में अच्छा दिखना बेहद अहम माना जाता है। इसी वजह से ब्यूटी पार्लर, मेकअप और ब्यूटी प्रोड्क्ट्स का बाजार वहां बहुत फल फूल रहा है। वहां बेहतर दिखने के लिए प्लास्टिक सर्जरी कराना भी आम है, लेकिन अब कुछ दक्षिण कोरियाई महिलाएं खूबसूरती के परंपरागत पैमानों को चुनौती दे रही हैं और मेकअप के खिलाफ आंदोलन कर रही हैं।

विरोध कर रही महिलाएं

इसके पीछे बड़ी वजह सिर्फ ये नहीं है कि दक्षिण कोरिया की महिलाएं मेकअप के परंपरागत पैमानों को तोड़ना चाहती हैं, बल्कि ये औरतें कसे हुए कपड़ों, कोरिया के मशहूर बाउल हेअरकट और चश्मों के खिलाफ भी हैं। महिलाओं के मुताबिक इन चीजों को त्यागने से वे प्रति महीने 100 डॉलर खर्च होने से बचा लेती हैं। अपनी छोटी सी आजादी के लिए आंदोलन करती महिलाओं को समर्थन कम, गालियां और जान से मारने की धमकी अधिक मिलीं। 



अब स्कूली बच्चों पर मेकअप करने का दबाव बनाया जा रहा है। वह पहले से ही स्कूल की पढ़ाई को लेकर तनाव में रहते हैं और मेकअप उनपर और तनाव बढ़ा रहा है। अब छोटी-छोटी बच्चियां भी मेकअप को सफलता से जोड़ रही हैं। छोटे बच्चों के लिए बेची जा रही मेकअप किट के विज्ञापन में 6 साल की बच्ची बोलती है "मैं अपनी मां को देखती हूं और उन्हें ही फॉलो करती हूं। मैं आज आगे बढ़ रही हूं।"

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