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न्यूजीलैंड में मतदान का आखिरी दिन आज: राजनीति की बात करना बना अपराध, चर्चा में अनोखा कानून; कितना जुर्माना?

Sat, 07 Nov 2026 07:22 AM IST
देवेश त्रिपाठी पीटीआई, वेलिंगटन

सार

न्यूजीलैंड में चुनाव प्रक्रिया का अंतिम चरण शनिवार को मतदान के साथ पूरा हो रहा है। यहां चुनाव के दिन राजनीतिक गतिविधियों और मतदाताओं को प्रभावित करने वाली चर्चाओं पर सख्त रोक रहती है। इस नियम के तहत राजनीतिक विज्ञापन, चुनावी सर्वे और मतदान केंद्रों के बाहर मतदाताओं से बातचीत तक प्रतिबंधित है।
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न्यूजीलैंड में चुनावी चुप्पी के बीच वोटिंग का अंतिम दिन - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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न्यूजीलैंड में शनिवार को आम चुनाव के लिए मतदान का अंतिम दिन शुरू हो गया। मतदान केंद्र खुलने के साथ ही मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। चुनाव के नतीजे शनिवार शाम जारी किए जाने की उम्मीद है।
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देश में 26 अक्तूबर से मतदान की प्रक्रिया जारी है। न्यूजीलैंड के निर्वाचन आयोग के अनुसार, गुरुवार के अंत तक करीब 38 लाख पंजीकृत मतदाताओं में से 16 लाख से अधिक लोग अपना वोट डाल चुके थे। शनिवार को मतदान केंद्र सुबह नौ बजे खुले और शाम सात बजे बंद होंगे।

चुनाव से पहले बना कानून, मतदान के दिन किसी को प्रभावित करना अपराध
न्यूजीलैंड में चुनाव का दिन राजनीतिक गतिविधियों से लगभग पूरी तरह दूर रहता है। इसकी वजह एक अनोखा कानून है, जिसके तहत मतदान के दिन किसी व्यक्ति को वोट देने के लिए प्रभावित करना आपराधिक अपराध है। मतदान केंद्र बंद होने तक लागू रहने वाली 19 घंटे की चुनावी पाबंदी के दौरान राजनीतिक दलों, मीडिया संस्थानों और सोशल मीडिया यूजर्स समेत किसी को भी चुनाव से जुड़ी ऐसी टिप्पणी करने की अनुमति नहीं होती, जिससे मतदाता का फैसला प्रभावित हो सकता है।
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इसमें चुनाव के संभावित नतीजों, प्रचार के मुद्दों और मतदान के तरीके को प्रभावित करने वाली अन्य बातों पर चर्चा भी शामिल है। मतदान के दिन ओपिनियन पोल जारी नहीं किए जा सकते। एग्जिट पोल कराने और मतदान केंद्रों के बाहर लोगों से चुनाव को लेकर बातचीत करने पर भी रोक है।

कानून में शामिल क्या-क्या नियम?
राजनीतिक दलों के होर्डिंग और विज्ञापनों को आधी रात तक हटाना जरूरी होता है। ऐसे में अक्सर राजनीतिक दलों के समर्थक आखिरी समय में सड़कों के किनारे लगे प्रचार बोर्ड हटाते दिखाई देते हैं। यह कानून बंपर स्टिकर, टी-शर्ट और यहां तक कि सोशल मीडिया प्रोफाइल पर लगी तस्वीरों पर भी लागू होता है। इसका उल्लंघन करने पर 20,000 न्यूजीलैंड डॉलर (करीब 11,000 अमेरिकी डॉलर) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

हालांकि, समाचार माध्यम राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के नाम बता सकते हैं, लेकिन उन्हें यह ध्यान रखना होता है कि उनकी प्रस्तुति से किसी मतदाता का फैसला प्रभावित न हो। चुनाव के दिन से पहले प्रकाशित राजनीतिक सामग्री को हटाना जरूरी नहीं है।

राजनीतिक नेता मतदान के दिन अपने परिवार के साथ खरीदारी करते या दूसरे सामान्य काम करते हुए दिखाई देते हैं। वे निजी नागरिकों की तरह बाहर निकलने की योजना बनाते हैं, ताकि सार्वजनिक रूप से उनकी मौजूदगी बनी रहे, लेकिन मौजूदा घटनाओं पर कोई टिप्पणी न करनी पड़े। 2017 में एक प्रमुख राजनीतिक दल की नेता ने अपने घर के बाहर इंतजार कर रहे पत्रकारों को स्वेटपैंट पहने और बाड़ पर पेंट करते हुए अपनी तस्वीरें लेने की अनुमति दी थी।

सोशल मीडिया पर राजनीतिक बहस की जगह कुत्तों की तस्वीरें
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव के दिन राजनीतिक गतिविधियों पर रोक लगाने वाले इन नियमों की अब जरूरत नहीं है। इसकी वजह यह है कि न्यूजीलैंड में मतदान के दिन से लगभग दो सप्ताह पहले ही वोट डालने की सुविधा मिलती है। इस दौरान चुनाव प्रचार, विज्ञापन और लगातार समाचार कवरेज जारी रहता है। पांच करोड़ नहीं, बल्कि 50 लाख की आबादी वाले न्यूजीलैंड में 2023 के चुनाव के दौरान आधे से अधिक मतदाताओं ने मतदान के आधिकारिक दिन से पहले ही वोट डाल दिया था।

हालांकि, इस कानून को बदलने की मांग बहुत कम रही है। इसके समर्थकों का कहना है कि चुनावी चुप्पी का यह नियम मतदाताओं को बिना किसी दबाव या दखल के निजी तौर पर मतदान करने का अवसर देता है। मतदान के दिन सोशल मीडिया पर राजनीतिक टिप्पणियां साझा करने के बजाय कुत्तों की तस्वीरें पोस्ट करने की परंपरा बन गई है। लोग मतदान केंद्रों पर पहुंचे कुत्तों की तस्वीरें साझा करते हैं।

रंगों के इस्तेमाल को लेकर भी विशेष सावधानी बरती जाती है। मतदान केंद्रों के बाहर लगे संकेतक, चुनाव अधिकारियों की वर्दी और चुनावी विज्ञापनों में नजर आने वाला 'ऑरेंज गाइ' नाम का किरदार चमकीले नारंगी रंग का होता है। इस रंग का इस्तेमाल इसलिए किया जाता है, क्योंकि यह किसी प्रमुख राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं है।

देश की एकमात्र संसद के लिए होता है चुनाव
न्यूजीलैंड में संसद का केवल एक सदन है और यहां राज्यों की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में केंद्र सरकार के पास देश की दिशा तय करने की काफी शक्ति होती है। यहां हर तीन साल में चुनाव होते हैं। मतदाता सीधे देश के नेता का चुनाव नहीं करते, बल्कि अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी और अपने क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले स्थानीय उम्मीदवार को वोट देते हैं। सरकार बनाने के लिए किसी एक पार्टी या गठबंधन को संसद की आधे से अधिक सीटें यानी बहुमत हासिल करना जरूरी होता है। 

पड़ोसी देश ऑस्ट्रेलिया के विपरीत न्यूजीलैंड में मतदान करना अनिवार्य नहीं है। हालांकि, मतदान के योग्य नागरिकों के लिए पंजीकरण कराना जरूरी है। पहले न्यूजीलैंड में पात्र नागरिक मतदान करने तक अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज करा सकते थे। लेकिन दिसंबर 2025 में लागू किए गए नए कानून के तहत मतदान के दिन से 13 दिन पहले पंजीकरण की अंतिम तारीख तय कर दी गई। इस बदलाव के कारण इस साल 25 अक्तूबर तक पंजीकरण नहीं कराने वाले लोगों को मतदान केंद्रों से वापस लौटाया जा सकता है। 

न्यूजीलैंड का निर्वाचन आयोग शनिवार को चुनावी रात खत्म होने तक डाले गए कुल मतों में से 95 प्रतिशत के नतीजे जारी करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। अंतिम परिणाम 27 नवंबर तक आने की उम्मीद है। इसमें विदेश में रहने वाले न्यूजीलैंड के नागरिकों के डाक और अन्य मत भी शामिल होंगे।
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