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अमेरिका का नया नियम: 30 पार कर चुके सैनिकों की टेस्टोस्टेरोन जांच अब जरूरी, पेंटागन ने जारी की गाइडलाइन

Fri, 18 Sep 2026 08:26 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी आईएएनएस,वॉशिंगटन

सार

पेंटागन ने 30 साल से अधिक उम्र के अमेरिकी पुरुष सैनिकों में टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य स्क्रीनिंग के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। जांच में पहले स्वास्थ्य संबंधी संकेतों और जोखिमों को देखा जाएगा। आइए जानते हैं कि नई गाइडलाइन में और क्या है? 
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अमेरिकी सैनिकों की होगी टेस्टोस्टेरोन जांच - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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पेंटागन ने 30 साल और उससे ज्यादा उम्र के अमेरिकी सैनिकों के लिए टेस्टोस्टेरोन की कमी की अनिवार्य जांच शुरू करने के लिए नई क्लिनिकल गाइडलाइन जारी की हैं। इसके साथ ही, इलाज के लिए सीमाएं तय की हैं। वहीं, सिर्फ परफॉर्मेंस बेहतर बनाने के लिए इस हार्मोन का इस्तेमाल करने के खिलाफ चेतावनी भी दी है।
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रक्षा स्वास्थ्य एजेंसी ने क्या निर्देश जारी की है? 
रक्षा स्वास्थ्य एजेंसी ने 17 सितंबर को गाइडेंस जारी की। यह जुलाई के उस निर्देश के तहत पुरुष  सैन्य कर्मियों के लिए स्क्रीनिंग और इलाज की एक जैसी प्रक्रियाएं तय करती है, जिसमें सक्रिय और आरक्षित कर्मियों  शामिल हैं। 30 साल से कम उम्र के लोग स्क्रीनिंग के लिए अनुरोध कर सकते हैं। पेंटागन ने इस पहल को युद्ध की तैयारियों से जोड़ा।

पेंटागन की ओर से क्या कहा गया? 
पेंटागन के मुख्य प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, 'विभाग एक ऐसी तैयार और घातक लड़ाकू फोर्स बनाने और उसे बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जो युद्ध के मैदान में दबदबा बनाने और ताकत के जरिए शांति हासिल करने में सक्षम हो।' हालांकि, क्लिनिकल दस्तावेज में पुष्टि की गई कमी का इलाज करने और युद्ध के मैदान में बेहतर प्रदर्शन के लिए टेस्टोस्टेरोन देने के बीच स्पष्ट अंतर बताया गया है।
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इसमें कहा गया है, 'मौजूदा सबूतों के आधार पर, किसी बीमारी या कमी के इलाज के बजाय परफॉर्मेंस बेहतर बनाने के मकसद से दी जाने वाली सलाह को सही नहीं ठहराया जा सकता।' गाइडेंस के मुताबिक, स्क्रीनिंग की शुरुआत लक्षणों और जोखिम वाले कारकों (रिस्क फैक्टर्स) के व्यवस्थित आकलन से होती है। अगर यह आकलन पॉजिटिव आता है या लिस्ट में शामिल कोई जोखिम कारक मौजूद होता है, तो इसके बाद ब्लड टेस्ट किया जाता है। स्क्रीनिंग की जरूरत का मतलब यह नहीं है कि हर सर्विस मेंबर को अपने-आप हार्मोन ट्रीटमेंट मिल जाएगा।

बीमारी का पता लगाने के लिए लगातार कम टेस्टोस्टेरोन लेवल और उससे जुड़े लक्षणों का होना जरूरी है। सिर्फ लैब की कम रीडिंग या सिर्फ लक्षण काफी नहीं हैं। गाइडलाइन के अनुसार, अलग-अलग दिनों में खाली पेट सुबह के समय खून के दो सैंपल लेने चाहिए। इसमें यह भी कहा गया है कि अगर टोटल टेस्टोस्टेरोन रीडिंग नॉर्मल रेंज में होने के बावजूद लक्षण बने रहते हैं, तो आगे और टेस्ट किए जाने चाहिए।

इसके लक्षणों में क्या होती है? 
इसके लक्षणों में ऊर्जा में कमी, ध्यान लगाने में दिक्कत, मांसपेशियों का कम होना और उदास महसूस करना शामिल हो सकता है। गाइडेंस में चेतावनी दी गई है कि ये लक्षण नींद की कमी, मानसिक तनाव, जरूरत के हिसाब से कैलोरी न लेने और मिलिट्री सर्विस में आम दूसरी स्थितियों जैसे भी हो सकते हैं। गाइडेंस में बताए गए मिलिट्री सर्विलांस रिकॉर्ड से पता चलता है कि 2018 और 2025 के बीच, हर साल 1% से भी कम पुरुष सर्विस मेंबर में एक्टिव क्लिनिकल डायग्नोसिस पाया गया।

टेस्टोस्टेरोन थेरेपी से क्या फायदा होते है? 
डॉक्यूमेंट में कहा गया है कि टेस्टोस्टेरोन थेरेपी से शरीर की बनावट और बोन मिनरल डेंसिटी में फायदे देखे गए हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि ऊर्जा, जीवन-शक्ति, शारीरिक कार्यक्षमता या सोचने-समझने की क्षमता (कॉग्निशन) को बेहतर बनाने के लिए इसके इस्तेमाल का समर्थन करने वाले सबूत नहीं हैं। साथ में दी गई मरीजों के लिए जानकारी वाली शीट से यह साफ होता है कि इलाज करवाना  एक विकल्प है।

थेरेपी से जिनकी हालत स्थिर है। उन्हें आम तौर पर बिना किसी विशेष छूट (वेवर) के तैनाती के लिए भेजा जा सकता है, बशर्ते दवा का प्रकार ऐसा हो। इलाज करने वालों को तैनाती की अवधि और उसके बाद के 90 दिनों के लिए पर्याप्त दवा का इंतजाम करना होगा, या फिर दोबारा दवा सप्लाई करने की योजना का रिकॉर्ड रखना होगा। खास तरह की ड्यूटी के लिए अलग नियम लागू रहेंगे।
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