कोरोना वायरस की उत्पत्ति कहां हुईं और वह कैसे फैला, इसका सच अभी भी दुनिया के लिए अबूझ पहेली बनी हुई है, लेकिन एक नए अध्ययन में ऐसे इलाकों को जरूर खोजा गया है, जहां कोरोना वायरस के पनपने की संभावना है।
दुनियाभर में बदलते जमीन के इस्तेमाल, जंगलों के सिमटने, खेती के बढ़ने और मवेशियों के पालन में आए फर्क के आधार पर इन हॉट-स्पॉट्स की पहचान की गई है।
ये ऐसी जगहें हैं जहां चमगादड़ों से इंसानों में कोरोना वायरस आने की स्थितियां बन सकती हों। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, पॉलिटेक्निक यूनिवर्सिटी ऑफ मिलान और न्यूजीलैंड की मेसी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है।
इनमें से कई हॉट-स्पॉट चीन में हैं जहां मीट से जुड़े उत्पादों की मांग बढ़ी है। इसकी वजह से बड़े स्तर पर जानवरों का पालन किया जा रहा है। एक जगह पर जेनेटिकली एक समान आबादी के इतने करीब रहने पर किसी महामारी के तेजी से फैलनी की संभावना बढ़ जाती है।
विश्लेषण में यह भी पाया गया कि जापान, उत्तरी फिलिपींस और चीन में शंघाई के पास जंगल छोटे होने से हॉटस्पॉट बन सकते हैं। वहीं, भारत-चीन के पास और थाईलैंड में भी जानवरों की संख्या बढ़ने से ऐसा हो सकता।
हॉर्सशू चमगादड़ के जरिए इंसानों को संक्रमित करने की संभावना
वैज्ञानिकों का मानना है कि हॉर्सशू चमगादड़ में मौजूद वायरस सीधे या पैंगोलिन जैसे जानवर के जरिए इंसानों को संक्रमित कर सकता है। इन चमगादड़ों में कई तरह के कोरोना वायरस रहते हैं, खासकर सार्स सीओवी-2।
नए अध्ययन में रिमोट सेंसिंग की मदद से ऐसे इलाकों को देखा गया जहां ये चमगादड़ रहते हैं और वहां जमीन के इस्तेमाल को समझा गया। पश्चिमी यूरोप से लेकर दक्षिणपूर्व एशिया तक छोटे होते जंगल, इंसानी रिहाइश और कृषि के लिए इस्तेमाल इलाकों को समझा गया जहां चमगादड़ बसते हों। इनमें से ऐसी जगहों की पहचान की गई, जहां चमगादड़ से इंसानों में वायरस जा सकता हो।
अध्ययन के सह शोधकर्ता बर्कली यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर पाओलो डि ओडोरीको ने बताया कि जमीन के इस्तेमाल के बदलने का लोगों की सेहत पर अहम असर पड़ता है क्योंकि हम पर्यावरण को बदल रहे है।
डब्ल्यूएचओ ने कहा- अब कोरोना का सिर्फ एक वैरिएंट ही घातक
भारत में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच राहत की खबर मिली है। दरअसल, भारत में मिले कोरोना वायरस के वैरिएंट के खतरे को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि 'डेल्टा' का अब सिर्फ एक वैरिएंट ही चिंता का विषय है, जबकि बाकी दो स्ट्रेन का खतरा कम हो गया है।
कोरोना के इस वेरिएंट को बी.1.617 के नाम से जाना जाता है। इसकी वजह से भारत में कोरोना की दूसरी लहर में भारी तबाही देखने को मिली। यह ट्रिपल म्यूटेंट वैरिएंट है क्योंकि यह तीन प्रजातियों (लिनिएज) में है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने मंगलवार को कहा कि सबसे पहले भारत में मिले कोविड-19 का 'डेल्टा' वैरिएंट का अब बस एक स्ट्रेन ही अब चिंता का विषय है, जबकि बाकी दो स्ट्रेन का खतरा कम हो गया है। कोरोना के इस वैरिएंट को बी.1.617 नाम से जाना जाता है। इसके तीन वैरिएंट बी.1.617.1, बी.1.617.2 और बी.1.617.3 हैं।