वैश्विक भू-रणनीतिक तनाव को एक बड़ा खतरा करार देते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक तनाव हाल के समय में अपने उच्चतम स्तर पर है जिससे हिंसक संघर्ष, आतंकवाद, परमाणु हथियार, जबरन विस्थापन और विश्व में एक बड़ी दरार का जोखिम सामने है। इस चुनौती से निपटने के लिए शांति व सुरक्षा प्रयासों पर विशेष तौर पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। युद्ध की रोकथाम, मध्यस्थता, शांतिरक्षा और टिकाऊ शांति के जरिए दीर्घकालीन विकास इन प्रयासों का अहम अंग होंगे।
उन्होंने कहा, 'हमें मध्यस्थता की अपनी क्षमता को मजबूत करना होगा और टिकाऊ शांति के औजारों को भी, जिससे लंबे समय के लिए विकास हो सके। हमें ऐसी परिस्थितियों का निर्माण करना होगा जिससे हमारे क्षेत्रीय साझेदार यूएन चार्टर के चैप्टर सात के तहत समुचित फंडिंग के साथ असरदार ढंग से शांति लागू कर पाएं और आतंकवाद विरोधी अभियानों को आगे बढ़ाएं।'
उन्होंने जलवायु संकट का नाम लिया जो मानवता के अस्तित्व के लिए खतरा है। बढ़ते तापमान और गर्म होती धरती से अतीत के रिकॉर्ड टूट रहे हैं, दस लाख प्रजातियों के विलुप्त होने का जोखिम है।
उन्होंने जलवायु संकट से मुकाबले के लिए कार्रवाई की महत्वाकांक्षा बढ़ाने पर जोर दिया है। कार्बन उत्सर्जन को घटाने व उसके प्रभावों को कम करने, जलवायु अनुकूलन को बढ़ावा देने और जलवायु कार्रवाई के लिए वित्तीय संसाधनों का प्रबंध करना अहम होगा और इन कोशिशों को 2020 में स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में होने वाले जलवायु सम्मेलन, कॉप-26, में मजबूती देने की योजना है।
उन्होंने कहा, 'अगले जलवायु सम्मेलन में (ग्लासगो में कॉप-26) सरकारों को कायापलट कर देने वाले ऐसे बदलाव संभव बनाने होंगे जिनकी विश्व को जरूरत है और लोग जिनकी मांग कर रहे हैं - कार्रवाई के लिए बढ़ी हुई महत्वाकांक्षा के साथ ऐसा करना होगा।'
विश्व में भरोसे का अभाव भी एक बड़ी चुनौती है, और लोग मान चुके हैं कि वैश्वीकरण उनके हित में नहीं है। राजनैतिक संस्थाओं में विश्वास घट रहा है। इस समस्या पर पार पाने के लिए एक ऐसा वातावरण बनाना अहम है जिसमें वैश्वीकरण सभी के लिए निष्पक्ष हो। विश्व नेताओं ने एक न्यायोचित व निष्पक्ष दुनिया के निर्माण के लिए वर्ष 2015 में एक एजेंडा पारित किया था। संयुक्त राष्ट्र वर्ष 2030 एजेंडा के उन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए इस वर्ष 'कार्रवाई के दशक' की शुरुआत कर रहा है।
'कार्रवाई के इस पूरे दशक में, हमें ग़रीबी उन्मूलन, सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और बीमारियों, शिक्षा, ऊर्जा, जल, स्वच्छता, टिकाऊ परिवहन, बुनियादी ढांचे और इंटरनेट सुलभता में निवेश करना होगा।' साथ ही महासचिव ने विश्व नेताओं से भरोसा बहाल करने के लिए प्रयास करने और अपने नागरिकों की बात सुनने का आहवान किया है ताकि युवाओं से रचनात्मक समाधान सुने जा सकें।
डिजिटल टेक्नोलॉजी के आगमन से दुनिया में भारी बदलाव आया है लेकिन इसका एक स्याह पक्ष भी है। इससे श्रम बाजारों पर असर पड़ा है, नफरत भरे संदेशों की बाढ़ आ गई है और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (कृत्रिम बुद्धिमता) से घातक स्वचालित हथियारों की आशंका गहरा रही है। विश्व में सकारात्मक बदलाव के लिए टेक्नोलॉजी का सहारा लेना अहम है लेकिन इसके लिए शिक्षा प्रणाली को नए सिरे से डिजाइन किया जाना होगा।
यूएन प्रमुख के मुताबिक लोगों को बताना होगा कि जीवन-पर्यंत किस तरह नई चीजें सीखी जा सकती हैं। साथ ही साइबर अपराधों से निपटना, साइबर माध्यमों पर फैलती नफरत पर लगाम कसना, साइबर जगत में प्रभावी ढंग से नियमों को लागू करना और घातक स्वचालित हथियारों पर पाबंदी लगाना महत्वपूर्ण होगा।