अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चुनाव अभियान के दौरान अमेरिका को फिर महान बनाने के अलावा जो प्रमुख वादे किए थे, उनमें रूस-यूक्रेन युद्ध रुकवाना और पश्चिम एशिया में शांति बहाल करना महत्वपूर्ण थे। इन वादों को पूरा करने के अलावा अमेरिका की सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने की महती जिम्मेदारी ट्रंप ने अपने भरोसेमंद और सेना के पूर्व अधिकारी माइकल जॉर्ज ग्लेन वाल्ट्ज को सौंपी है। सेना में ढाई दशक से अधिक समय तक सेवा देने वाले पूर्व कर्नल माइकल वाल्ट्ज को रक्षा, विदेश और व्यापार जैसे अहम मसलों का विशेषज्ञ माना जाता है। वाल्ट्ज व्यापार में अमेरिका के सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी चीन के मुखर आलोचक हैं, वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की गतिविधियों की भी भर्त्सना करते हैं, तो भारत के उतने ही बड़े समर्थक भी हैं।
पचास वर्षीय वाल्ट्ज ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) होंगे। अमेरिका में एनएसए का पद इतना शक्तिशाली होता है कि उसके लिए सीनेट की अनुमति की जरूरत नहीं पड़ती। राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रमुख मुद्दों पर वह सीधे राष्ट्रपति ट्रंप को जानकारी देंगे और विभिन्न एजेंसियों के साथ तालमेल बिठाएंगेे। वाल्ट्ज पर ट्रंप इतना भरोसा क्यों करते हैं? इस बात की पुष्टि इससे भी होती है कि जनवरी, 2020 में जब अमेरिका ने ईरान के शीर्ष सुरक्षा और खुफिया कमांडर मेजर जनरल कासिम सुलेमानी को एयर स्ट्राइक में मार गिराया था, तब ट्रंप की ओर से व्हाइट हाउस में जिन चुनिंदा लोगों को इसकी जानकारी दी गई थी, उनमें वाल्ट्ज भी थे।
शुरुआत और शिक्षा
31 जनवरी, 1974 को फ्लोरिडा के बॉयंटन बीच में जन्में वाल्ट्ज का पालन-पोषण उनकी अकेली मां ने किया। उनके दादा नौसेना प्रमुख रह चुके हैं। उन्होंने वर्जीनिया मिलिट्री इंस्टीट्यूट से बीए ऑनर्स की उपाधि प्राप्त की और अमेरिकी सेना और नेशनल गार्ड में 27 साल तक अपनी सेवाएं दीं। वाल्ट्ज वर्ष 2018 में रिपब्लिकन पार्टी की ओर से फ्लोरिडा के जिले-6 से हाउस (संसद) प्रतिनिधि चुने गए। वह पहले ऐसे ग्रीन बैरेट बने, जिन्हें हाउस के लिए चुना गया।
बेटे का नाम 'आर्मी'
वाल्ट्ज की पत्नी डॉ. जूलिया नेशीवाट भी सेना में रही हैं। नेशीवाट ट्रंप के पहले कार्यकाल में घरेलू सुरक्षा सलाहकार रही थीं। वह जॉर्ज बुश तथा बराक ओबामा के शासन में भी अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। उनकी एक बेटी और एक बेटा है। वाल्ट्ज और जूलिया, दोनों का सेना से गहरा लगाव होने के कारण उन्होंने अपने बेटे का नाम ‘आर्मी’ रखा है। हालांकि, उसका असली नाम अरमान बेन वाल्ट्ज है।
कई किताबें भी लिखीं
माइकल वाल्ट्ज ने एक सैनिक और नीति सलाहकार के रूप में अपने अनुभवों पर आधारित वॉरियर डिप्लोमैट : ए ग्रीन बेरेट्स बैटल्स फ्रॉम वाशिंगटन टू अफगानिस्तान शीर्षक से पुस्तक लिखी है। हार्ड ट्रुथ्स : थिंक एंड लीड लाइक ए ग्रीन बैरेट शीर्षक से उनकी नई पुस्तक इसी वर्ष प्रकाशित हुई है। उन्होंने बच्चों की एक पुस्तक डॉन ऑफ द ब्रेव भी लिखी है। किताबों से मिलने वाली रॉयल्टी को वह सेना, वर्तमान और पूर्व सैनिकों तथा उनके परिजनों की मदद के लिए बनी मैथ्यू पुचिनो फाउंडेशन को दान कर देते हैं। वह व्हाइट हाउस और अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) के सलाहकार भी रह चुके हैं।
ओबामा-बाइडन के आलोचक
बराक ओबामा और मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन की नीतियों के कटु आलोचक हैं। वह अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना को वापस बुलाने के लिए बाइडन की कड़ी निंदा करते हैं। उन्होंने कहा था कि जब तक यह निश्चित नहीं हो जाता कि तालिबान अलकायदा से हाथ नहीं मिलाएगा, तब तक अफगानिस्तान से सैन्य वापसी ठीक नहीं।
बहादुरी पर तमगे
वाल्ट्ज ने अफगानिस्तान, पश्चिम एशिया और अफ्रीका में अपनी सेवाएं दीं। उन्हें चार ब्रॉन्ज स्टार भी मिले हैं, जिनमें दो बहादुरी के लिए मिले। कोविड-19 के दौरान वाल्ट्ज ने आगे बढ़कर सेवा कार्य किया, जिसमें वह खुद कोविड पॉजिटिव हो गए थे। माइकल अपना खुद का व्यवसाय भी चलाते हैं, जिसमें चार सौ से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैंैं। उनके व्यवसाय को कई बार अमेरिका की सबसे तेजी से बढ़ने वाली निजी कंपनियों में से एक के रूप में सूचीबद्ध किया जा चुका है।
ट्रंप के चहेते
ट्रंप कह चुके हैं कि माइकल मेरी ‘अमेरिका पहले’ विदेश नीति एजेंडे के चैंपियन हैं। वह न सिर्फ खुलेआम ट्रंप विरोधी लोगों की आलोचना करते हैं, बल्कि सार्वजनिक रूप से ट्रंप के विदेश नीति संबंधी विचारों की प्रशंसा करने से भी गुरेज नहीं करते। वह डोनाल्ड ट्रंप को विघ्नहर्ता मानते हैं।