रूस का एक सैन्य उपग्रह, यूक्रेन की सेना से जुड़े एक कमर्शियल रडार-इमेजिंग उपग्रह के काफी करीब आ गया है। इससे यह चिंता पैदा हो गई है कि मॉस्को पश्चिमी देशों की अंतरिक्ष संपत्तियों पर नजर रखने, उनमें बाधा डालने या उन्हें खतरा पहुंचाने की तैयारी कर रहा हो सकता है।
रूस के 'कॉसमॉस 2612' उपग्रह ने अपनी कक्षा (ऑर्बिट) में बदलाव करके उसे 'ICEYE-X36' उपग्रह की कक्षा के समान कर लिया है। 'ICEYE-X36' को फिनलैंड की कंपनी 'ICEYE' संचालित करती है, और इसकी रडार-इमेजिंग क्षमताओं ने रूस के साथ युद्ध के दौरान यूक्रेन की मदद की है।
अंतरिक्ष दौड़ कहां कैद हुआ?
इस अंतरिक्ष दौड़ को एस2ए सिस्टम्स ने कैमरे में कैद किया, जो अंतरिक्ष स्थितिजन्य जागरूकता के लिए सिस्टम संचालित करती है। इन असामान्य गतिविधियों ने अंतरिक्ष-सुरक्षा विशेषज्ञों का ध्यान खींचा है, जिनका कहना है कि रूसी अंतरिक्ष यान के इरादे अभी भी स्पष्ट नहीं हैं।
अंतरिक्ष यान कैसे पहुंचा करीब?
ऑर्बिटल ट्रैकिंग विश्लेषण के अनुसार, कॉसमॉस 2612 ने 30 सितंबर से कई बार अपनी स्थिति और दिशा में बदलाव (मैनुवर) किए। इसके साथ ही अक्तूबर में भी इसमें कुछ और सुधार किए गए। इन बदलावों की मदद से रूसी उपग्रह, ICEYE-X36 के समान ऑर्बिटल प्लेन और ऊंचाई पर आ गया, जिससे वह इस कमर्शियल अंतरिक्ष यान के काफी करीब पहुंचने में सक्षम हो गया।
17 अक्तूबर को, एक्सिओस द्वारा दी गई ट्रैकिंग जानकारी के अनुसार, रूसी उपग्रह ICEYE-X36 से लगभग पांच किलोमीटर की दूरी पर था। बाद के ऑर्बिटल अनुमानों से पता चला कि यह और भी करीब आ गया था, हालांकि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध ट्रैकिंग डेटा में अनिश्चितताओं के कारण सटीक दूरी बता पाना मुश्किल है।
रूस इस सैटेलाइट का पीछा क्यों कर रहा है?
ICEYE सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) सैटेलाइट्स का संचालन करता है, जो रात के समय और बादलों के बीच से भी पृथ्वी की सतह की तस्वीरें ले सकते हैं। ये सैटेलाइट सैन्य खुफिया जानकारी के लिए बहुत उपयोगी हैं, जैसे कि सैनिकों की आवाजाही, वाहनों की निगरानी और रणनीतिक स्थानों पर होने वाले बदलावों पर नजर रखना।
यूक्रेन ने ICEYE की सैटेलाइट-इमेजिंग क्षमताओं का इस्तेमाल किया है। साथ ही, अंतरिक्ष-आधारित खुफिया सहयोग को बढ़ाने के लिए ICEYE का यूक्रेन के रक्षा मंत्रालय के एक ग्राहक के साथ समझौता भी है। हालांकि, इस बात की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है कि ICEYE-X36 खुद अभी यूक्रेनी सेना को सीधे तौर पर कोई मदद दे रहा है।
दूसरे सैटेलाइट का मेल खाना क्यों महत्वपूर्ण?
किसी दूसरे सैटेलाइट के ऑर्बिटल प्लेन (कक्षा के तल) से मेल खाना एक महत्वपूर्ण उपाय है, क्योंकि इसमें ईंधन की खपत होती है। इससे कोई अंतरिक्ष यान अपने लक्ष्य के काफी करीब पहुंच सकता है, और इसमें अतिरिक्त खर्च भी कम आता है।
इस तरह के अभियानों को 'रेंडेवू' (मिलन) और 'प्रॉक्सिमिटी ऑपरेशन' (निकटता अभियान) कहा जाता है। इनके पीछे वैध उद्देश्य हो सकते हैं, लेकिन इनका इस्तेमाल किसी सैटेलाइट की बारीकी से जांच करने या संभावित रूप से कार्रवाई करने के लिए भी किया जा सकता है।
अंतरिक्ष-सुरक्षा शोधकर्ताओं ने क्या चेतावनी दी?
अंतरिक्ष-सुरक्षा शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि 'कॉसमॉस 2612' की गतिविधियों से रूस को उस सैटेलाइट की जाँच करने, उसके कामकाज में बाधा डालने, या खुद को किसी संभावित 'एंटी-सैटेलाइट' (सैटेलाइट-रोधी) हमले की स्थिति में लाने का मौका मिल सकता है। ये केवल संभावित स्थितियां हैं, न कि रूस के पक्के इरादे। ऐसी कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है कि ICEYE-X36 को कोई नुकसान पहुंचा है या वह निष्क्रिय हो गया है।