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लकवाग्रस्त लोगों के लिए संवाद की नई उम्मीद: दिमाग की भाषा समझेगा इम्प्लांट, शब्दों के साथ इशारों को भी पढ़ेगा

Tue, 15 Sep 2026 01:54 PM IST
प्रशांत तिवारी अमर उजाला नेटवर्क

सार

 वैज्ञानिकों ने लकवे से प्रभावित लोगों के लिए ऐसी ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस  तकनीक विकसित की है, जो मस्तिष्क के संकेतों को शब्दों के साथ-साथ हाथ, सिर और शरीर के हाव-भाव में बदल सकती है। AI आधारित इस प्रणाली ने शुरुआती परीक्षणों में उत्साहजनक सटीकता दिखाई है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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जो लोग गंभीर लकवे के कारण बोलने और शरीर को हिलाने-डुलाने में असमर्थ हैं, उनके लिए वैज्ञानिकों ने संवाद का नया रास्ता तलाशा है। शोधकर्ताओं ने ऐसा ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (बीसीआई) विकसित किया है, जो व्यक्ति के दिमाग में पैदा होने वाले विद्युत संकेतों से बोलने और इशारे करने की मंशा को एक साथ पहचान सकता है। यह तकनीक शब्दों को स्क्रीन पर टेक्स्ट में बदलने के साथ डिजिटल अवतार के जरिए हाथ, सिर और शरीर के हाव-भाव भी दिखा सकती है।

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एआई से गतिविधियों को किया गया डिकोड
नेचर न्यूरोसाइंस में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक बीसीआई में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से मस्तिष्क की गतिविधियों को डिकोड किया गया। अब तक बीसीआई पर हुए ज्यादातर अध्ययनों में बोलने या शरीर की गतिविधियों में से किसी एक क्षमता को बहाल करने पर ध्यान दिया गया था। नई प्रणाली की खासियत यह है कि यह दोनों तरह के संकेतों को एक साथ समझने की कोशिश करती है।

इस्तेमाल किया गया 253 इलेक्ट्रोड वाला सर्जिकल इम्प्लांट
इस प्रणाली में 253 इलेक्ट्रोड वाला सर्जिकल इम्प्लांट इस्तेमाल किया गया। इसे मस्तिष्क के सेंसरिमोटर कॉर्टेक्स की सतह पर लगाया गया। यह क्षेत्र बोलने और शरीर की गतिविधियों से जुड़े तंत्रिका संकेतों के लिए महत्वपूर्ण है। इलेक्ट्रोड मस्तिष्क की गतिविधि को रिकॉर्ड करते हैं और एआई मॉडल इन संकेतों से व्यक्ति की इच्छित भाषा और इशारे पहचानता है।अध्ययन में दो प्रतिभागियों को शामिल किया गया। पहले व्यक्ति को ब्रेनस्टेम स्ट्रोक के बाद बोलने और चलने-फिरने में गंभीर परेशानी थी। शोधकर्ताओं ने उससे पांच वाक्यों को चुपचाप बोलने की कोशिश करने तथा हाथ हिलाने, सिर हिलाने, हाथ हिलाकर संकेत देने और ताली बजाने जैसे इशारे करने को कहा। दूसरे प्रतिभागी को एएलएस यानी एमियोट्रॉफिक लेटरल स्क्लेरोसिस नाम की मोटर न्यूरॉन बीमारी थी। इससे उसकी बोलने और शरीर को नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हुई थी। उससे 10 वाक्यों को बोलने की कोशिश करने और कंधे उचकाने या अंगूठा ऊपर करने जैसे 10 इशारों की कल्पना करने को कहा गया।
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हैलो के साथ हाथ भी हिलेगा
वैज्ञानिकों ने केवल बोलने, केवल इशारे करने और दोनों को एक साथ करने के दौरान मस्तिष्क के संकेत रिकॉर्ड किए। उदाहरण के लिए हैलो के साथ हाथ हिलाने या ‘हां’ के साथ सिर हिलाने जैसी स्थितियों को भी प्रशिक्षण में शामिल किया गया।इसके बाद एआई डिकोडर को इन संकेतों को शब्दों, इशारों या दोनों के रूप में पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया गया।शोधकर्ताओं ने पाया कि जब सिस्टम को तीनों तरह के डेटा से प्रशिक्षित किया गया तो वह एक साथ बोले गए शब्दों और इशारों को पहचानने में अधिक सटीक रहा।इसके बाद दोनों प्रतिभागियों के लिए उनके अनुरूप फुल-बॉडी वर्चुअल अवतार तैयार किए गए। बातचीत के दौरान प्रतिभागी जिस वाक्य या इशारे का प्रयास करते थे, सिस्टम उसे पहचानकर स्क्रीन पर टेक्स्ट और अवतार की गतिविधि के रूप में प्रस्तुत करता था। पहले प्रतिभागी के पांच में से तीन बातचीत परीक्षणों में भाषण और इशारे, दोनों की मीडियन डिकोडिंग सटीकता 100 प्रतिशत रही। दूसरे प्रतिभागी में भाषण की औसत सटीकता 75 प्रतिशत और इशारों की 85 प्रतिशत रही।

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अभी शुरुआत, आगे लगातार संवाद का लक्ष्य
वैज्ञानिकों ने इसे अभी प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट बताया है। प्रणाली फिलहाल सीमित शब्दावली और अलग-अलग वाक्यों तथा इशारों को पहचानती है। यह अभी लगातार सामान्य बातचीत या हाथ की हर गतिविधि को पूरी तरह ट्रैक करने में सक्षम नहीं है।मास्ट्रिख्ट यूनिवर्सिटी के कम्प्यूटेशनल न्यूरोसाइंटिस्ट क्रिश्चियन हर्फ ने परिणामों को उच्च गुणवत्ता वाला बताया, लेकिन कहा कि इस अध्ययन में भाषण डिकोडिंग का स्तर पहले सामने आ चुकी कुछ तकनीकों से कम है।शोधकर्ताओं का अगला लक्ष्य बड़ी शब्दावली के साथ लगातार संवाद और शरीर के अलग-अलग हिस्सों की अधिक स्वाभाविक गतिविधियों को नियंत्रित करना है। वे हाथ के करीब 15 जोड़ों की लगातार गतिविधियों को नियंत्रित करने की क्षमता विकसित करने पर भी काम करना चाहते हैं। इस दिशा में सफलता मिलने पर बीसीआई केवल लकवाग्रस्त व्यक्ति के विचारों को शब्दों में बदलने तक सीमित नहीं रहेगा। वह बातचीत के दौरान सिर हिलाने, हाथ उठाने या अन्य हाव-भाव भी व्यक्त कर सकेगा। यानी भविष्य में ऐसी तकनीक गंभीर रूप से लकवाग्रस्त लोगों को शब्दों के साथ संवाद की अभिव्यक्ति भी वापस दिलाने में मदद कर सकती है।

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