खगोल विज्ञानियों और ब्रह्मांडीय शोध में लगे वैज्ञानिकों को चौंकाने वाले संकेत मिले हैं। चंद्रमा से आए इस नए सबूत के कारण 50 वर्ष पुराना महाविनाश का सिद्धांत सवालों के घेरे में आ गया है। नए अध्ययन के मुताबिक चांद पर उल्कापिंडों की टक्कर किसी एक भीषण दौर में नहीं हुई, बल्कि अरबों वर्षों तक होती रही है। जानिए और क्या पता लगा
चंद्रमा के शुरुआती इतिहास को लेकर वैज्ञानिकों की 50 वर्षों से चली आ रही अवधारणा अब नए सिरे से जांच के दायरे में आ गई है। चीन के चांग-ई-6 मिशन द्वारा पहली बार चंद्रमा के पृथ्वी से हमेशा छिपे रहने वाले दूरस्थ (फारसाइड) हिस्से से लाए गए चट्टानी नमूनों के अध्ययन में ऐसे प्रमाण मिले हैं।
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इसने लेट हेवी बॉम्बार्डमेंट सिद्धांत पर गंभीर सवाल खड़े किए। इसके अनुसार, चंद्रमा पर उल्कापिंडों की टक्करें किसी छोटे और विनाशकारी दौर में नहीं, बल्कि अरबों वर्षों तक धीरे-धीरे होती रहीं। शोधकर्ताओं ने कहा, यदि आगे के शोध भी इसकी पुष्टि करते हैं, तो न केवल चंद्रमा के विकासक्रम बल्कि प्रारंभिक पृथ्वी व जीवन की उत्पत्ति से जुड़ी वैज्ञानिक समय-रेखा पर भी नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।
4.33 अरब वर्ष पुराने संकेत भी मिले
शोधकर्ताओं ने प्रभाव के कारण पिघली 28 सूक्ष्म चट्टानी संरचनाओं का विश्लेषण किया। इनमें से कुछ नमूनों की आयु के संकेत 4.33 अरब वर्ष पुराने आंके गए, जबकि अन्य की आयु 1.13 अरब वर्ष तक की मिली। तीन नमूनों की आयु लगभग 4.16 अरब वर्ष निकली।
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नए अध्ययन में नहीं मिला किसी महाविनाशकारी दौर का प्रमाण
चांग-ई-6 के नमूनों में वैज्ञानिकों को लगभग 3.9 अरब वर्ष पहले की टक्करों का कोई बड़ा समूह नहीं मिला। यानी नए अध्ययन में महाविनाशकारी दौर का कोई खास प्रमाण नहीं मिला है।