भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर बुधवार को इस्राइल पहुंचेंगे। उनके इस्राइली समकक्ष प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस यात्रा को महत्वपूर्ण बताया है। उनके अनुसार, इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक, राजनयिक और सुरक्षा सहयोग बढ़ेगा। विशेष रूप से हाई-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), और क्वांटम टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों पर फोकस रहेगा। नेतन्याहू के अनुसार, ये भारत-इस्राइल संबंधों को नई दिशा देगा।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साप्ताहिक कैबिनेट मीटिंग में ये बातें कहीं। नेतन्याहू ने कहा, सहयोग के एक और खास क्षेत्र पर भी मेरा पूरा ध्यान है। हम हाई-टेक, एआई और क्वांटम में सहयोग को आगे बढ़ाएंगे। तय कार्यक्रमानुसार दोपहर को वो नेसेट (इस्राइली संसद) को संबोधित करेंगे, और दोनों नेता याद वाशेम (विश्व होलोकॉस्ट स्मरण केंद्र) जाएंगे और यरुशलम में एक इनोवेशन इवेंट में शामिल होंगे।
नेतन्याहू ने भारत के साथ मिलकर चरमपंथ के खिलाफ सशक्त समूह बनाने की बात की। उन्होंने कहा इस्राइल “मिडिल ईस्ट के आसपास या अंदर एक पूरा सिस्टम बनाएगा—असल में गठबंधनों का एक तरह का हेक्सागन, जिसमें भारत, ग्रीस, साइप्रस और बिना नाम वाले अरब, अफ्रीकी और एशियाई देशों का नाम शामिल है।
उन्होंने कहा, यहां मकसद ऐसे देशों की एक धुरी बनाना है जो कट्टरपंथियों की धुरी के उलट, असलियत, चुनौतियों और लक्ष्यों को एक ही तरह से देखें। इन सभी देशों का नजरिया अलग है, और हमारे बीच सहयोग से बहुत अच्छे नतीजे मिल सकते हैं और बेशक, यह हमारी ताकत और हमारे भविष्य को भी पक्का कर सकता है।
9 साल बाद इस्राइल जा रहे मोदी
नेतन्याहू को पीएम मोदी की यात्रा से काफी उम्मीदें हैं। 15 फरवरी को यरूशलम में बड़े अमेरिकी-यहूदी संगठनों की कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, नेतन्याहू ने कहा था कि दोनों प्रधानमंत्री हर तरह के सहयोग पर चर्चा करने वाले हैं। उन्होंने कहा, अब भारत कोई छोटा देश नहीं है। यहां 140 करोड़ लोग रहते हैं। भारत बहुत ताकतवर है और बहुत लोकप्रिय भी है। बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 फरवरी को इस्राइल के अपने दो दिवसीय दौरे की शुरुआत करेंगे। 9 साल बाद वो इस्राइल जा रहे हैं। पहली बार वो 2017 में गए थे तब ये किसी भी भारतीय पीएम की पहली इस्राइल यात्रा थी।
इनपुट: आईएएनएस