हाल ही में संपन्न उपचुनावों में तीन में से दो सीटें जीतने वाली आरएसपी ने प्रधानमंत्री प्रचंड के साथ सत्ता साझेदारी समझौते पर पहुंचने में विफल रहने के बाद शुक्रवार को सरकार से समर्थन वापस ले लिया।
सत्तारूढ़ गठबंधन में शामिल एक पार्टी द्वारा सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड को प्रतिनिधि सभा में एक और विश्वास मत हासिल करने की जरूरत है। नेपाल के शीर्ष नेताओं ने शनिवार को प्रचंड से यह बात कही।
विज्ञापन
नेकपा-माओवादी केंद्र के मुख्य सचेतक हितराज पांडेय ने बताया कि सत्तारूढ़ गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने बालूवतार में प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर बैठक हुई। इसमें प्रधानमंत्री प्रचंड, नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा, नेकपा-एकीकृत समाजवादी के अध्यक्ष माधव कुमार नेपाल और जनता समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र यादव सहित पांच दलों के गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया।
पांडे ने पीटीआई-भाषा को बताया कि रवि लमिछाने के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सरकार से समर्थन वापस लेने के बाद भी प्रचंड के नेतृत्व वाली सरकार के पास 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा (एचओआर) में आसानी से बहुमत है। उन्होंने कहा कि इसलिए प्रधानमंत्री को प्रतिनिधि सभा में फिर से विश्वास मत हासिल करने की जरूरत है।
विज्ञापन
हाल ही में संपन्न उपचुनावों में तीन में से दो सीटें जीतने वाली राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) ने प्रधानमंत्री प्रचंड के साथ सत्ता साझेदारी समझौते पर पहुंचने में विफल रहने के बाद शुक्रवार को सरकार से समर्थन वापस ले लिया। आरएसपी ने आरोप लगाया कि प्रचंड सरकार भ्रष्टाचार के मुद्दे से निपटने में विफल रही है। नेपाल की संसद में चौथी सबसे बड़ी पार्टी आरएसपी के निचले सदन में 22 सांसद हैं।
पिछले साल दिसंबर में गठित प्रचंड के नेतृत्व वाली सरकार में भाग लेने वाली आरएसपी ने भले ही फरवरी में सरकार छोड़ दी थी, लेकिन उसने 'स्थिरता के लिए' अपना समर्थन वापस नहीं लिया। दिसंबर में प्रधानमंत्री नियुक्त किए गए प्रचंड ने पहली बार जनवरी में और फिर इस साल मार्च में विश्वास मत हासिल किया था।