नेपाल की सबसे पुरानी और प्रमुख राजनीतिक पार्टी नेपाली कांग्रेस मार्च में होने वाले आम चुनाव से ठीक पहले गंभीर आंतरिक संकट से गुजर रही है। पार्टी के भीतर गहराता मतभेद अब विभाजन की आशंका तक पहुंच गया है। काठमांडू में चल रहे विशेष महाधिवेशन के दौरान शीर्ष नेतृत्व को लेकर खुली बगावत सामने आई है, जिससे पार्टी की एकजुटता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
नेपाली कांग्रेस में लंबे समय से नेतृत्व और नीतिगत फैसलों को लेकर असंतोष चल रहा था। पार्टी के महासचिवों के नेतृत्व में 40 फीसदी से अधिक निर्वाचित प्रतिनिधियों की मांग पर विशेष महाधिवेशन बुलाया गया। पार्टी संविधान के अनुसार इतनी संख्या में मांग होने पर विशेष महाधिवेशन अनिवार्य है। आयोजकों का दावा है कि 54 से 60 फीसदी प्रतिनिधियों का समर्थन उन्हें प्राप्त है, जिससे साफ है कि असंतोष व्यापक है।
ये भी पढ़ें- पुणे नगर निगम चुनाव: एनसीपी का प्रचार संभालने वाली कंपनी के कार्यालय पहुंची अपराध शाखा, अजित पवार ने क्या कहा?
यह सिर्फ कार्यक्रम नहीं, बगावत है- गगन थापा
महाधिवेशन के बंद सत्र के समापन पर महासचिव गगन कुमार थापा ने तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य पार्टी कार्यक्रम नहीं, बल्कि बगावत है। चुप रहना खुद को खत्म करने जैसा है। थापा ने साफ किया कि यह आयोजन पदों के लिए नहीं, बल्कि सवाल उठाने और बदलाव के लिए है। उनके इस बयान ने पार्टी के भीतर टकराव को और तेज कर दिया।
नेतृत्व को लेकर टकराव कहां पहुंचा?
विशेष महाधिवेशन के दौरान पुराने चुनाव आयोग को भंग कर नए पांच सदस्यीय चुनाव पैनल का गठन किया गया। इसके साथ ही पार्टी अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा के खेमे और महाधिवेशन समर्थकों के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया। देउबा गुट का कहना है कि बिना दो-तिहाई बहुमत के न तो केंद्रीय समिति भंग की जा सकती है और न ही निर्वाचित अध्यक्ष को हटाया जा सकता है। वहीं, महाधिवेशन समर्थक इस दावे को खारिज कर रहे हैं।
ये भी पढ़ें- क्या अगले 25 साल भारत के लिए आसान होंगे? लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने अशांत पड़ोस के बीच गिनाए खतरे
समझौते की कोशिशें या टूट की तैयारी?
- देउबा गुट और बागी खेमे के बीच चार-चार सदस्यीय टीमों की बातचीत।
- नेतृत्व पदों, नीतिगत दस्तावेजों और टिकट वितरण पर चर्चा।
- काठमांडू के लाजिमपाट इलाके में लगातार बैठकों का दौर।
- वरिष्ठ नेता शेखर कोइराला समेत कई नेता मध्यस्थता में जुटे।
चुनाव से पहले संकट क्यों गंभीर है?
यह विशेष महाधिवेशन ऐसे समय हो रहा है, जब देश मार्च 2026 में आम चुनाव की ओर बढ़ रहा है। संसद भंग होने और अंतरिम सरकार के गठन के बाद राजनीतिक हालात पहले ही अस्थिर हैं। सितंबर में हुए युवा आंदोलनों और हिंसा ने देश की राजनीति को झकझोर दिया था। ऐसे माहौल में नेपाली कांग्रेस का बंटना न सिर्फ पार्टी, बल्कि नेपाल की राजनीतिक स्थिरता के लिए भी बड़ा झटका माना जा रहा है।
महाधिवेशन समर्थक कहते हैं कि उनका मकसद पार्टी को तोड़ना नहीं, बल्कि सुधार और जवाबदेही तय करना है। वहीं, देउबा खेमे का जोर किसी भी कीमत पर विभाजन रोकने पर है। लेकिन दोनों पक्षों की दलीलें और संविधान की अलग-अलग व्याख्याएं यह संकेत दे रही हैं कि सहमति आसान नहीं होगी। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि नेपाली कांग्रेस एकजुट रह पाएगी या इतिहास में एक और विभाजन जुड़ जाएगा।
अन्य वीडियो-