Nepal: डोनाल्ड लू उस समय नेपाल आए हैं, जब नेपाल में अमेरिका के स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम (एसपीपी) को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। आलोचक इस प्रोग्राम में नेपाल के शामिल होने के इरादे की कड़ी आलोचना करते रहे हैं। इसके दबाव में कुछ समय पहले प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की सरकार ने एसपीपी में ना शामिल होने का फैसला किया था...
अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री डोनाल्ड लू की ताजा यात्रा को अमेरिकी एजेंडे में नेपाल के बढ़े महत्त्व का संकेत समझा जा रहा है। लू दो दिन की नेपाल यात्रा पर गुरुवार को काठमांडू पहुंचे। साल भर के भीतर यह उनकी दूसरी नेपाल यात्रा है। इसके पहले पिछले साल नवंबर में वे यहां आए थे। उनकी उस यात्रा के बाद अमेरिकी संस्था मिलेनियम चैलेंज कॉरपोरेशन (एमसीसी) के 50 करोड़ डॉलर की मदद स्वीकार करने के लिए हुए करार के संसदीय अनुमोदन की प्रक्रिया को गति मिली थी। इस करार के संसदीय अनुमोदन को अमेरिका-नेपाल संबंध में एक बेहद अहम घटना माना गया।
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अब डोनाल्ड लू उस समय नेपाल आए हैं, जब नेपाल में अमेरिका के स्टेट पार्टनरशिप प्रोग्राम (एसपीपी) को लेकर विवाद छिड़ा हुआ है। आलोचक इस प्रोग्राम में नेपाल के शामिल होने के इरादे की कड़ी आलोचना करते रहे हैं। इसके दबाव में कुछ समय पहले प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा की सरकार ने एसपीपी में ना शामिल होने का फैसला किया था। बताया जाता है कि नेपाल का ये फैसला अमेरिका को पसंद नहीं आया।
अखबार काठमांडू पोस्ट में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक देउबा मंत्रिमंडल ने बीते 21 जून को एसपीपी में ना शामिल होने का निर्णय लिया था। लेकिन उस बारे में नेपाल के विदेश मंत्रालय ने अब तक अमेरिका को औपचारिक पत्र नहीं भेजा है। इसलिए इस मुद्दे पर विवाद जारी है। इसी बीच लू की नेपाल यात्रा से ये मामला और गरमा गया है। इस हफ्ते बुधवार को नेपाली संसद की अंतरराष्ट्रीय संबंध समिति ने देउबा सरकार से एसपीपी की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी। उसने सरकार से यह बताने को कहा कि इस प्रोग्राम में नेपाल के शामिल ना होने के फैसले के बारे में अब तक अमेरिका को औपचारिक पत्र क्यों नहीं भेजा गया है।
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काठमांडू स्थित अमेरिकी दूतावास के मुताबिक नेपाल को 2019 में एसपीपी में शामिल कर लिया गया था। इसके लिए नेपाल सरकार ने दो बार अनुरोध पत्र भेजा था। ये पत्र 2015 और 2017 में भेजे गए थे। इस लिहाज से नेपाल अभी एसपीपी का हिस्सा है। हालांकि दूतावास ने यह भी कहा है कि कोई देश इस प्रोग्राम में शामिल रहे या नहीं, यह फैसला करना उसका अधिकार है। कोई भी देश पत्र भेज कर प्रोग्राम में अपनी भागीदारी को खत्म कर सकता है।
एसपीपी को लेकर जारी विवाद का असर प्रधानमंत्री देउबा की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा पर पड़ा है। देउबा को जुलाई के मध्य में ही अपनी पहली सरकारी यात्रा पर अमेरिका जाना था। अगर ये यात्रा होती, तो दो दशक में पहली बार कोई नेपाली प्रधानमंत्री आधिकारिक यात्रा पर अमेरिका जाता। लेकिन समझा जाता है कि एसपीपी को लेकर उठे विवाद के कारण देउबा की अमेरिका यात्रा अनिश्चित हो गई है। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने जुलाई के आरंभ में कहा था कि प्रधानमंत्री के अमेरिका जाने की संभावना है। लेकिन पिछले हफ्ते उसने कहा कि अभी तक यात्रा की पुष्टि नहीं हुई है।
इसी बीच डोनाल्ड लू नेपाल आए हैं। इसे नेपाल को अपने हक में प्रभावित करने की अमेरिकी इच्छा से जोड़ कर देखा जा रहा है। हाल के समय में नेपाल में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए अमेरिका और चीन के बीच तीखी होड़ दिखी है। इस यात्रा को भी उसी सिलसिले का हिस्सा समझा जा रहा है।