हाल के वर्षों में पहली बार नेपाल के एक बड़े तबके में चीन के खिलाफ गुस्सा पैदा होने के संकेत मिल रहे हैं। नेपाल के व्यापारियों का इल्जाम है कि चीन ने उनके देश की अघोषित नाकाबंदी कर दी है। उसने पिछले 16 महीनों से आयात किए गए गए कंटेनरों को नेपाल की सीमा में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी है। इसका नेपाल के व्यापारियों पर बहुत खराब असर पड़ा है।
यहां के अखबार काठमांडो पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले अक्तूबर-नवंबर के त्योहारी सीजन में लगभग 2000 कंटेनर चीन ने सीमा पर रोक लिए। इन कंटेनरों में कपड़े, जूते, कॉस्मेटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक कच्चा माल भरा हुआ था। त्योहारी सीजन के बाद भी थोड़े से कंटेनरों को ही नेपाल में जाने की इजाजत दी गई है।
नेपाल ट्रेडर्स फेडरेशन के अध्यक्ष नरेश कतुवाल ने काठमांडू पोस्ट से कहा कि उनके कंटेनरों को उत्तरी सीमा पर कोरोना महामारी के बहाने रोक रखा गया है। कतुवाल ने बताया कि तकरीबन 300 कंटेनरों को केरुंग और टाटापानी सीमाओं पर बीते 16 महीनों से रोक रखा गया है।
त्योहारी सीजन में चीन ने गिने-चुने कंटेनरों को ही नेपाल जाने की इजाजत दी। इसलिए ज्यादातर आयातकों ने अपने सामान भारत के कोलकाता रूट से आयातित किए। इस कारण उन्हें परिवहन का भारी अतिरिक्त बोझ सहना पड़ा। कतुवाल ने कहा कि व्यापारियों ने कई बार चीन के साथ इस मुद्दे पर बातचीत की है।
सभी संबंधित मंत्रालयों से जुड़े नेपाल के राजनीतिक नेताओं के सामने भी ये मुद्दा उठाया गया है। नेपाल के विदेश मंत्रालय से भी अनुरोध किया गया कि वह इस मुद्दे को राजनयिक स्तर पर हल करे। लेकिन इन सबका कोई लाभ नहीं हुआ है। कतुवाल ने कहा- हम चीन के इस रुख को अनौपचारिक नाकाबंदी मान रहे हैं। अगर ये हाल जारी रहा तो चीन के साथ व्यापार करने का कोई मतलब नहीं बचेगा।
व्यापारियों के आरोप की पुष्टि आंकड़ों से भी हुई है। नेपाल के व्यापार और निर्यात प्रोत्साहन सेंटर के मुताबिक इस वित्त वर्ष के पहले छह महीनों में चीन से आयात में 18.5 फीसदी की गिरावट आई। इसी अवधि में चीन के लिए होने वाले निर्यात में 50 फीसदी कमी आई। नेपाल के उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय के एक अधिकारी ने काठमांडो पोस्ट से कहा- हम मसले को हल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन कोई बात हमारे पक्ष में नहीं जा रही है।
नेपाल चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में निर्यात प्रोत्साहन समिति के अध्यक्ष मनीष लाल प्रधान के मुताबिक चीन सीमा पर व्यापार मार्ग लगभग बंद हैं। इस कारण नेपाल से हस्तशिल्प से बनी वस्तुओं का चीन के लिए निर्यात नहीं हो पा रहा है। इसलिए सवाल सिर्फ आयात थमने का नहीं है। निर्यात में भी भारी गिरावट आई है।
नेपाल के उद्योग, वाणिज्य और आपूर्ति मंत्रालय में संयुक्त सचिव प्रकाश दहल के मुताबिक ल्हासा स्थित नेपाली महादूत ने सीमा पर व्यापार स्थलों का दौरा किया है। उऩ्हें चीन के अधिकारियों ने बताया कि टोटोपानी में मेंटेनेंस का काम चल रहा है। यह काम आठ फरवरी को पूरा हो जाएगा। उसके बाद 20 फरवरी से कंटेनरों को डिस्पैच किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तब तक सबको इंतजार करना चाहिए। दहल ने यह भी कहा कि व्यापारी फंसे कंटेनरों की संख्या बढ़ा-चढ़ा कर बता रहे हैं।
लेकिन इसी मंत्रालय के एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि नेपाल सीमा को पूरी तरह खोलने की कोशिश कर रहा है, जबकि चीन इसके लिए अनिच्छुक है। चीन का कहना है कि जब तक कोरोना वायरस के संक्रमण की संभावना शून्य नहीं हो जाती, सीमा को पूरी तरह नहीं खोला जा सकता। दहल ने कहा कि चीन ने जो सावधानियां सुझाई हैं, नेपाल सबका पालन कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई की समस्या जल्द खत्म हो जाएगी। इसके बावजूद इस मसले ने नेपाल-चीन संबंधों में कड़वाहट घोल दी है, इसमें कोई शक नहीं है।