नेपाल की भोटेकोशी नदी में आई भयानक अचानक बाढ़ ने चीन के साथ व्यापार को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे त्योहारों के मौसम से पहले चीनी सामान की समय पर सप्लाई और उनकी कीमतों को लेकर चिंता बढ़ गई है। यह जानकारी बुधवार को आई एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक है।
'द राइजिंग नेपाल' अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, अचानक आई बाढ़ ने बॉर्डर के इंफ्रास्ट्रक्चर और जोड़ने वाली सड़कों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे चीन से आयातित सामान ले जा रहे कार्गो ट्रकों की आवाजाही बाधित हो गई है।
व्यापारियों के सामने नई चुनौती क्या है?
इस वजह से व्यापारियों को वैकल्पिक रास्ते खोजने पड़ रहे हैं, जबकि दशईं, तिहार और छठ जैसे त्योहारों से पहले कंज्यूमर गुड्स (उपभोक्ता सामान) की मांग बढ़ने की उम्मीद है। नेपाल ट्रांस-हिमालयन बॉर्डर कॉमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राम हरि कार्की ने कहा कि तुरंत मांग पूरी करने के लिए चीन से सामान मंगाना एक चुनौती बन गया है। उन्होंने कहा कि इस रुकावट से त्योहार से जुड़े सामान की सप्लाई पर असर पड़ सकता है और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च बढ़ सकता है।
बॉर्डर कॉमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष ने क्या बताया?
उन्होंने कहा, 'चीन से केरुंग की ओर 500 से 600 से ज्यादा चीनी कंटेनर आ रहे थे, जिनमें तीज, दशईं, तिहार और छठ के लिए सामान लदा था। रसुवागढ़ी बॉर्डर के क्षतिग्रस्त होने के बाद इनमें से कई कंटेनर रास्ते में ही फंस गए हैं।'
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अबतक कितने कंटेनर बहे हैं?
इस बीच, बाढ़ में 200 से ज्यादा नेपाली कंटेनर बह गए। उन्होंने कहा, 'बाढ़ में 200 कंटेनर बह गए और व्यापारियों को कम से कम 2 अरब नेपाली रुपये का नुकसान हुआ है।' रसुवागढ़ी, चीन के साथ नेपाल के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक है और यहां से बड़ी मात्रा में चीनी सामान का आयात होता है।
व्यापारियों के लिए स्थिति और मुश्किल हो गई है क्योंकि नेपाल-चीन व्यापार का एक और अहम रास्ता, तातोपानी बॉर्डर भी ठीक से काम नहीं कर रहा है। कार्की ने बताया कि उत्तर की ओर जाने वाले दोनों मुख्य रास्ते बाधित होने के कारण व्यापारियों को मुस्तांग में कोराला बॉर्डर से सामान ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा है।
'कोराला बॉर्डर का इस्तेमाल हमारी मजबूरी है'
कार्की के अनुसार, लगभग 176 कार्गो ट्रक पहले ही कोराला की ओर भेजे जा चुके हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि मुश्किल रास्तों, ज्यादा ऊंचाई और ज्यादा समय लगने के कारण यह रास्ता रसुवागढ़ी का व्यावहारिक और साल भर चलने वाला विकल्प नहीं हो सकता। कार्की ने कहा, 'कोराला बॉर्डर का इस्तेमाल हमारी मजबूरी है, कोई विकल्प नहीं।'
एक कार्गो वाहन की कितनी लागत होगी?
कार्की ने कहा कि कोराला रास्ते से चीन से नेपाल तक सामान लाने और वापस जाने में कम से कम 10 से 12 दिन लग सकते हैं, जबकि पहले व्यापारी जो रास्ते इस्तेमाल करते थे, वे इससे छोटे थे।व्यापारियों के अनुसार, कोराला बॉर्डर से काठमांडू तक एक कार्गो वाहन के परिवहन की लागत अभी लगभग 4,50,000 से 5,00,000 नेपाली रुपये है। कार्की ने बताया कि इससे परिवहन लागत में लगभग 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
नेपाल पुलिस ने झूठे दावे पर क्या कहा?
इसके साथ ही नेपाल पुलिस ने लोगों को सोशल मीडिया पर झूठे और बेबुनियाद दावे फैलाने के खिलाफ चेतावनी दी है। इन दावों में आरोप लगाया गया था कि सुरक्षा एजेंसियों ने अचानक आई बाढ़ (से प्रभावित लोगों के लिए भेजी गई राहत सामग्री तो ले ली, लेकिन उसे बांटा नहीं।
यह चेतावनी सीपीएन (यूएमएल) के सेक्रेटरी महेश बसनेत के उन आरोपों के बाद जारी की गई, जिनमें कहा गया था कि राहत सामग्री को सेना और पुलिस की बैरकों और दफ्तरों में रखा गया था और कुछ खाने-पीने की चीजें खराब हो गई थीं।
अबतक कितने लोगों की मौत हुई है?
वहीं, नेपाल बाढ़ में मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 1,365 हो गई। नेपाल पुलिस के समाचार बुलेटिन के अनुसार, बचाव दल 5,326 लोगों की तलाश कर रहे हैं, जिनमें कम से कम 589 विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो अभी भी लापता हैं।