नेपाल सरकार ने एक और दो रुपये के सिक्कों से साल 2020 में शामिल किए गए लिपुलेख और कालापानी वाले नए राजनीतिक नक्शे को हटाने का फैसला किया है। अब इन सिक्कों पर नेपाल के सबसे पुराने, 7वीं सदी के 'लो ग्याकर मठ' की तस्वीर दिखाई देगी। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद नेपाल राष्ट्र बैंक ने नए सुरक्षा फीचर्स के साथ सिक्के छापने की तैयारी शुरू कर दी है।
नेपाल सरकार ने एक और दो रुपये के सिक्कों पर बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अब इन सिक्कों से नेपाल का नया राजनीतिक नक्शा हटाकर उसकी जगह सातवीं शताब्दी के ऐतिहासिक 'लो ग्याकर (घार) मोनेस्ट्री' (मठ) की तस्वीर अंकित की जाएगी। आधिकारिक सूत्रों ने इस ऐतिहासिक फैसले की पुष्टि की है।
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इस सप्ताह की शुरुआत में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में नेपाल राष्ट्र बैंक को एक और दो रुपये मूल्यवर्ग के नए डिजाइन के सिक्के जारी करने की मंजूरी दे दी गई। गुरुवार को हुई कैबिनेट बैठक में सिक्कों के डिजाइन में बदलाव का यह अंतिम फैसला लिया गया, जिसके बाद गृह मंत्रालय और केंद्रीय बैंक को आगे की कार्रवाई के लिए निर्देश भेज दिए गए हैं।
नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरुप्रसाद पौडेल ने बताया कि सरकार की मंजूरी मिलने का साफ मतलब है कि सिक्कों का डिजाइन अब बदल चुका है। सूचना एवं संचार मंत्रालय ने भी इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि नए सिक्कों में सुरक्षा के बेहतर इंतजाम और नए डिजाइन शामिल होंगे, जिससे कम मूल्यवर्ग की मुद्रा का प्रबंधन आसान हो जाएगा।
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क्या है इस 7वीं सदी के मठ का अनोखा इतिहास?
नेपाल राष्ट्र बैंक अब मुस्टंग जिले के मारंग गांव में स्थित 7वीं सदी के लो ग्याकर (घार) मोनेस्ट्री की तस्वीर को सिक्कों के अग्रभाग पर उकेरने की तैयारी कर रहा है। यह मठ नेपाल का सबसे पुराना मठ माना जाता है। मान्यता है कि इस ऐतिहासिक मठ का निर्माण गुरु पद्मसंभव ने करवाया था।
सिक्कों पर इस मठ की तस्वीर आने के बाद साल 2020 में जारी किया गया नेपाल का विवादित राजनीतिक नक्शा अपने आप सिक्कों से हट जाएगा। आपको बता दें कि नेपाल के संविधान संशोधन के बाद लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी क्षेत्रों को शामिल कर साल 2078 (विक्रम संवत) में 'चुच्चे' (नकीला) नक्शे वाला सिक्का जारी किया गया था। अब करीब पांच साल बाद इस नक्शे को सिक्कों से पूरी तरह हटा दिया जाएगा।
क्या इस बदलाव के पीछे कोई बड़ा कूटनीतिक कारण है?
नेपाल सरकार के इस कदम को उसकी सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, राजनीतिक मोर्चे पर सिक्कों से उस नक्शे को हटाना एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिसने कुछ साल पहले भारत और नेपाल के रिश्तों में तनाव पैदा कर दिया था। अब देखना यह है कि केंद्रीय बैंक इन नए सिक्कों को बाजार में कब तक जारी करता है।