नेपाल में जेन-जी आंदोलन के दौरान सुप्रीम कोर्ट में भी आगजनी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के चलते देश के न्यायिक इतिहास का हिस्सा बनने वाले महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट हो गए। हालांकि कोर्ट ने जल्द से जल्द कामकाज फिर से शुरू करने का वादा किया।
नेपाल में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन और हिंसा से सरकारी और सार्वजनिक इमारतों को बड़ी क्षति पहुंची है। इस विरोध प्रदर्शन से नेपाल के सुप्रीम कोर्ट को भी बड़ा नुकसान हुआ। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विरोध प्रदर्शन के चलते देश के न्यायिक इतिहास का हिस्सा बनने वाले महत्वपूर्ण दस्तावेज नष्ट हो गए। हालांकि कोर्ट ने जल्द से जल्द कामकाज फिर से शुरू करने का वादा किया।
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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रकाशमान सिंह राउत ने कहा कि हम सभी परिस्थितियों में न्याय के मार्ग पर अडिग और दृढ़ हैं। हम नागरिकों की न्याय की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए जल्द से जल्द अदालती कामकाज फिर से शुरू करने का संकल्प लेते हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने देश भर में फैले जेन-जी आंदोलन के दौरान आगजनी, पथराव, तोड़फोड़ और लूटपाट के कारण अदालत भवनों को हुए नुकसान पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि नेपाल के न्यायिक इतिहास से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज हिंसा में लगभग नष्ट हो गए। राउत ने हिंसा में नेपाली नागरिकों की मौत पर भी शोक व्यक्त किया। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की।
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नेपाल की राजधानी काठमांडो बीते हफ्ते अचानक जल उठी। सोमवार सुबह 9 बजे सरकार ने फेसबुक, एक्स, यूट्यूब, व्हाट्सएप समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक को बंद करने का आदेश दिया। इसके बाद यूनिवर्सिटी कैंपस से प्रदर्शन शुरू हो गया। युवाओं ने वीपीएन यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क के जरिये लाइवस्ट्रीम चलाए और मीम्स-वीडियो के जरिये गुस्से को हवा दी।
शाम तक 10 जिले कर्फ्यू में थे और रात होते-होते पुलिस-भीड़ की हिंसक झड़पों में 19 लोग मारे जा चुके थे। अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ा और मंगलवार शाम 4 बजे प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। नेपाल पुलिस द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार विरोध प्रदर्शनों में एक भारतीय नागरिक सहित कम से कम 51 लोगों की मौत हो गई है। पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुशीला कार्की ने शुक्रवार रात नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली, जो अंतरिम सरकार का नेतृत्व करेंगी। इसके साथ ही कई दिनों से चल रही राजनीतिक अनिश्चितता समाप्त हो गई।