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नेपाल: संसद भंग करने के निर्णय पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को भेजा कारण बताओ नोटिस

Fri, 25 Dec 2020 04:00 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काठमांडो
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नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली (फाइल फोटो) - फोटो : Social Media
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नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने संसद भंग किए जाने के फैसले को लेकर शुक्रवार को नेपाल सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। गौरतलब है कि रविवार को राष्ट्रपति विद्या भंडारी ने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की अनुशंसा पर प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया था और मध्यावधि चुनावों की घोषणा कर दी थी।

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यह पड़ोसी देश का ‘आंतरिक मामला’ -भारत 
वहीं, भारत ने गुरुवार को नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली के संसद को अचानक भंग करने और नए सिरे से चुनाव कराने के फैसले को पड़ोसी देश का ‘आंतरिक मामला’ करार देते हुए कहा था कि यह नेपाल को लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत तय करना है। नेपाल में जारी राजनीतिक घटनाक्रम पर सतर्क प्रतिक्रिया देते हुए भारत ने कहा कि वह पड़ोसी देश और वहां के लोगों का शांति, समृद्धि और विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने में समर्थन करना जारी रखेगा।

पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' को नया संसदीय दल का नेता घोषित किया गया
बीते दिनों अघोषित रूप से दो फाड़ हो चुकी सत्तारूढ़ दल के प्रचंड-नेपाल गुट ने पीएम ओली को संसदीय दल के नेता के पद से भी हटा दिया है। उनकी जगह पार्टी के इस गुट ने सर्वसम्मति से पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' को नया संसदीय दल का नेता घोषित किया है।
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ओली की जगह पार्टी के अध्यक्ष बने माधव कुमार नेपाल
वहीं, माधव कुमार अब नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की जगह पार्टी के अध्यक्ष बन गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को पार्टी विरोधी काम करने के कारण संसदीय दल के नेता से हटाकर प्रचंड को लाया गया है। पीएम ओली अपनी गलती को स्वीकार कर माफी मांगते है तो पार्टी में उनका स्वागत किया जाएगा।

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